चंडीगढ़, 21 अक्टूबर, 2026 (जगजीत सिंह): केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति वर्ष 2026-27 के दौरान गन्ने के रस, चीनी के सिरप और ‘बी-हेवी’ शीरे से इथेनॉल बनाने के लिए खरीद पर लगाई गई रोक पंजाब के किसानों, चीनी मिलों और कृषि से जुड़े उद्योगों को प्रभावित कर सकती है। यह चिंता शिरोमणि पंजाब मंच ने जताई है।
मंच के संस्थापक एवं संयोजक तथा पूर्व विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने इस संबंध में एक चर्चा पत्र जारी किया है। उनके अनुसार, गन्ने से ईंधन बनाने की मांग घटने से किसानों को गन्ने के भुगतान में देरी हो सकती है और मिलों द्वारा पहले किए गए निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
मंच ने यह भी तर्क दिया कि धान से इथेनॉल बनाने में गन्ने और मक्के की तुलना में अधिक पानी की खपत होती है। इसलिए सरकार को गन्ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय चीनी के भंडार और पानी की खपत को ध्यान में रखकर नीति बनानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि यह रोक शराब बनाने पर नहीं, बल्कि पेट्रोल में मिलाने के लिए गन्ने से बने इथेनॉल की सरकारी खरीद पर लगाई गई है। इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।






