Wednesday, November 4, 2026
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अगर भगवंत मान 5 साल से चुटकुले सुना रहे हैं, तो भाजपा ने 14 साल में पंजाब, पंजाबियों और सिख कौम के कौन से मुद्दे हल किए? : टिवाणा

फतेहगढ़ साहिब, 23 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): “पंजाब राज्य और यहाँ की धरती बीते 79 वर्षों से भारत के निवासियों को सेंट्रल पूल (केंद्रीय पूल) में सबसे अधिक गेहूं और चावल देकर पेट भरती आ रही है। इसके अलावा देश की सीमाओं पर बड़ी संख्या में शहादते और कुर्बानियां देकर दुश्मन के सामने दीवार बनकर रक्षा करती आ रही है। फिर अपनी धरती की ‘सरबत दा भला’ (सबका भला) वाली सोच के तहत देशवासियों की हर मुश्किल—चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो या आंतरिक दिशाहीन स्वार्थी सोच के कारण व्यवस्था से मानवता के समक्ष आने वाली समस्याएं हों—पंजाबी और सिख अपना ‘दसवंद’ (कमाई का 10वां हिस्सा) निकालकर ऐसे समय में बिना किसी भेदभाव के पीड़ितों को रोटी, कपड़ा, दवाइयां आदि स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करके सेवा करते आ रहे हैं।

परंतु दुख और अफसोस की बात है कि देश के शासकों ने पंजाब राज्य, पंजाबियों और सिखों के सभी संवैधानिक, सामाजिक, भौगोलिक, धार्मिक और नैतिक अधिकारों को कुचलकर निरंतर अमानवीय तरीके से पंजाबियों और सिखों के खून से होली खेली है। मानवता की सेवा में तत्पर रहने वाले पंजाबियों और सिखों को आतंकवादी, अलगाववादी, शरारती तत्व, गरमदलीय जैसे बदनाम करने वाले नाम देकर बदनाम करते हुए उन्हें बड़ी संख्या में फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और यातनाओं के जरिए मौत के मुंह में धकेलते आ रहे हैं।

पंजाब में इन सांप्रदायिक शासकों ने सामाजिक और मानवीय मूल्यों का बड़े पैमाने पर हनन करने के साथ-साथ पंजाबियों की कीमती नदियों, नहरों के पानी, चंडीगढ़, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के प्रमुख के पद, और बांधों से पैदा होने वाली बिजली को छीनकर खुद ही भारतीय संविधान के नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं।

अब जब पंजाब राज्य के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तो देश के गृह मंत्री अमित शाह और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी यह प्रचार कर रहे हैं कि भगवंत मान बीते 5 वर्षों से चुटकुले सुना रहे हैं और पंजाब राज्य को नशे के दलदल में धकेलकर जिंदगियों से खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि आम आदमी पार्टी यहाँ की कानून व्यवस्था या नशे के व्यापार की दोषपूर्ण व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है, तो श्री मोदी, शाह और नायब सिंह सैनी—जिनकी केंद्र में 14 वर्षों से सरकार है—उनके द्वारा इस लंबे समय के दौरान पंजाबियों और सिख कौम की समस्याओं को हल करने के लिए अब तक क्या कदम या प्रयास किए गए हैं? क्या इसके बारे में मोदी-शाह या नायब सिंह सैनी पंजाबियों और सिख कौम को जानकारी देंगे?”

यह विचार स. इकबाल सिंह टिवाणा (मुख्य प्रवक्ता, राजनीतिक एवं मीडिया सलाहकार, शिरोमणि अकाली दल – अमृतसर) ने चुनाव के समय को ध्यान में रखते हुए बीजेपी-आरएसएस और उनकी नेतृत्व द्वारा पंजाबियों और सिखों को गुमराह करके केवल अपनी राजनीतिक वोट प्राप्त करने की बात करते हुए प्रकट किए। उन्होंने मोदी-शाह और नायब सिंह सैनी जैसे स्वार्थी और मानवता विरोधी भाजपाइयों को पंजाबियों और सिख कौम की कचहरी में खड़ा किया।

उन्होंने कहा कि यदि आज पंजाब की जवानी नशे में डूबी है, लाखों की संख्या में भारी बेरोजगारी है, किसान-मजदूर, कर्मचारी, छात्र हर मोड़ और चौराहे पर संघर्ष करने के लिए मजबूर हैं, कानून व्यवस्था डगमगाई हुई है, तो इसके लिए अब तक पंजाब और केंद्र में शासन करने वाली बीजेपी-आरएसएस, कांग्रेस, बादल दल और आम आदमी पार्टी की सरकारें ही जिम्मेदार हैं। इन्होंने पंजाब, पंजाबियों और सिख कौम को लाचार बनाने की दुर्भावना के तहत राज्य और यहाँ के निवासियों के सभी वित्तीय और प्राकृतिक संसाधनों की बेरहमी से लूट-खसोट की है।

यहाँ कोई बड़ा उद्योग न देकर नदियों के पानी को जबर्दस्ती छीनकर कृषि प्रधान राज्य के उत्पादन और वित्तीय स्थिति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। लगभग 750 किसानों की जान लेने वाले ये लोग हैं, गुजरात और अन्य राज्यों से पंजाब में नशीले पदार्थों के कारोबार को संरक्षण देकर यहाँ के माहौल को खराब करने के दोषी ये हैं। सजाएं पूरी कर चुके सिखों को रिहा न करके कानून और संविधान का उल्लंघन करने वाले ये खुद हैं।

अब केवल और केवल वोट की राजनीति को ध्यान में रखकर 2029 तक पंजाब में नशा खत्म करने और यहाँ कानून व्यवस्था कायम करने के खोखले दावे कर रहे हैं। जबकि पंजाब की समग्र मौजूदा त्रासदी के लिए केंद्र और पंजाब में शासन करने वाली ये हिंदुत्ववादी ताकतें ही जिम्मेदार हैं। यहाँ तक कि गैर-पंजाबियों को पंजाब में बड़े राजनीतिक और सरकारी पद देकर पंजाब के खजाने पर बोझ डाला जा रहा है और यहाँ के खजाने की लूट-खसोट श्री केजरीवाल जैसे गैर-पंजाबी कर रहे हैं।

ये लोग पंजाबियों और सिखों को अब किसी भी तरह गुमराह नहीं कर सकेंगे। बल्कि सिखों और पंजाबियों को चाहिए कि 2027 के आने वाले विधानसभा चुनावों में पंजाबियों और सिख कौम की अपनी साझी सरकार कायम करने में योगदान दें, न कि मुगलों, अंग्रेजों और अफगानों की तरह बाहरी आक्रमणकारियों और लुटेरों को पंजाब की धरती का शासन सौंपने की गुस्ताखी करें।

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