चंडीगढ़, 26 अक्टूबर, 2026 (जगजीत सिंह): पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ईंट-भट्ठों में ईंधन के रूप में पराली से तैयार पेलेट्स के इस्तेमाल को अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ईंट पकाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में 30 प्रतिशत हिस्सा पराली के पेलेट्स का रखना होगा। इस पहल का उद्देश्य खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम करना और पराली का वैकल्पिक उपयोग बढ़ाना है।
किसानों को पराली बेचने का मिलेगा अवसर
इस व्यवस्था से किसानों को धान की पराली के निपटारे के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है। पराली को खेतों में जलाने के बजाय उसे पेलेट्स में बदलकर ईंट-भट्ठों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे फसल अवशेषों की मांग बढ़ने और किसानों को पराली की बिक्री से आमदनी प्राप्त होने की संभावना है।
पेलेट्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
आयोग ने ईंट-भट्ठों को पराली आधारित पेलेट्स की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पेलेट निर्माण इकाइयों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य भट्ठों को वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराना है, ताकि निर्धारित अनुपात में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
जिला स्तर पर शुरू हुई तैयारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्देशों को लागू कराने के लिए जिला स्तर के अधिकारियों ने ईंट-भट्ठा संचालकों से संपर्क कर बातचीत शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में पेलेट्स की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था और निर्धारित नियमों के अनुपालन पर ध्यान दिया जाएगा।
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने का प्रयास
धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाना उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की प्रमुख चिंताओं में से एक है। पराली का औद्योगिक ईंधन के रूप में उपयोग बढ़ने से खुले में फसल अवशेष जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पेलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता, उनकी लागत और ईंट-भट्ठों में नियमों के पालन पर निर्भर करेगी।






