धूरी, 26 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में धूरी की गांधी बस्ती में विशाल शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने महर्षि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा दिखाए गए सत्य, धर्म, समानता और न्याय के मार्ग पर चलने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। रामायण की शाश्वत शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान, संतों और पीर-फकीरों की पवित्र धरती पंजाब मानवता, स्वाभिमान और आपसी भाईचारे के मूल्यों को हमेशा बनाए रखेगी, जहां नफरत के बीज कभी नहीं पनप सकते।
शिक्षा को जीवन बदलने का सबसे शक्तिशाली माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पास की है, जबकि 2021 में यह संख्या केवल 80 थी। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किस प्रकार गरीब परिवारों के बच्चों के लिए सुनहरे भविष्य के रास्ते खोल रही है।
इस अवसर की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज संगरूर जिले के धूरी विधानसभा क्षेत्र की गांधी बस्ती में महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत सजाई गई विशाल शोभायात्रा में शामिल हुआ और औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। महर्षि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा रचित पवित्र रामायण नेकी, सच्चाई और समानता का शाश्वत संदेश देती है। उनकी महान शिक्षाएं आज भी हमारे समाज का मार्गदर्शन कर रही हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “कल मनाए जा रहे महर्षि भगवान वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर पंजाब सहित देश-विदेश में रहने वाली समस्त संगत को लाख-लाख बधाइयां। आइए, हम सभी महर्षि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनकी महान शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।”
महर्षि भगवान वाल्मीकि जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “संस्कृत साहित्य के पितामह और आदिकवि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी ने दुनिया को रामायण जैसा अमर महाकाव्य दिया, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का शाश्वत संदेश देता है। नैतिकता, आदर्श नेतृत्व और धार्मिक आचरण से संबंधित इसकी शिक्षाओं ने पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया है और आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज के भौतिकवादी युग में हमें सत्य, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत है। महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाएं हमें याद दिलाती हैं कि धर्म, समानता और प्रत्येक मनुष्य का सम्मान ही समाज की नींव होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पंजाब सौभाग्यशाली है कि उसका संबंध महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की पवित्र विरासत से है, जिन्होंने इस पवित्र धरती पर भगवान राम के पुत्रों लव और कुश को ज्ञान तथा शस्त्र विद्या प्रदान की। उन्होंने कहा कि महान संतों, गुरुओं, ऋषि-मुनियों और शहीदों ने हमेशा लोगों को विभाजनों से ऊपर उठकर एकता, भाईचारे और समानता पर आधारित समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया है।

शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी हथियार है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे अब देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं। इससे साबित होता है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।”
उन्होंने कहा, “हर साल 30 लाख से अधिक विद्यार्थी NEET की परीक्षा में बैठते हैं और यह बहुत गर्व की बात है कि हाल ही में घोषित परिणामों में पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने यह परीक्षा पास की है।”
सरकारी स्कूलों की शिक्षा में आए सुधार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के केवल 80 विद्यार्थियों ने NEET पास किया था। आज यह संख्या बढ़कर 882 हो गई है, जो महज चार वर्षों में लगभग 11 गुना वृद्धि है। यह उपलब्धि हमारे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।”
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें से अधिकतर विद्यार्थी सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, “इन विद्यार्थियों के माता-पिता में रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले, छोटे दुकानदार, सब्जी विक्रेता और अन्य मेहनतकश लोग शामिल हैं, जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कोई रेहड़ी लगाता है, कोई छोटी दुकान चलाता है और कोई सब्जियां बेचकर गुजारा करता है। इसके बावजूद उनके बच्चे अब NEET जैसी परीक्षाएं पास करके डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यही शिक्षा की वास्तविक ताकत है और हम पंजाब में इसी तरह का बदलाव लाना चाहते हैं। गरीबी को केवल आर्थिक सहायता, राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रहकर खत्म नहीं किया जा सकता। वास्तविक आर्थिक सशक्तीकरण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से आता है, जो बच्चों को सम्मानजनक करियर बनाने और अपने परिवारों का भविष्य सुरक्षित करने में सक्षम बनाती है।”
उन्होंने आगे कहा, “कल्याणकारी सुविधाएं सहारा दे सकती हैं, लेकिन शिक्षा बच्चों को अपने पूरे परिवार का भविष्य बदलने की ताकत देती है। अपने बच्चों को पढ़ाएं और उन्हें अधिकारी, डॉक्टर तथा पेशेवर बनने में मदद करें, ताकि वे अपने परिवारों को गरीबी से बाहर निकाल सकें। जब किसी गरीब परिवार का बच्चा डॉक्टर, अधिकारी या सफल पेशेवर बनता है, तो यह उपलब्धि न केवल उस बच्चे का जीवन बदलती है, बल्कि उसके पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संवार देती है।”
इस पवित्र अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने माताओं, बहनों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों का अपनी दैनिक जिम्मेदारियों के बावजूद शोभायात्रा में शामिल होने के लिए हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “मैं आज हमारे साथ जुड़े सभी श्रद्धालुओं का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं। हमारी माताओं, बहनों, भाइयों और बच्चों की उपस्थिति इस पवित्र अवसर को और भी विशेष बनाती है।”

उन्होंने कहा कि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी और अन्य महान आध्यात्मिक व्यक्तित्वों की शिक्षाएं लोगों को मानवता और आपसी सम्मान के मूल्यों पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेंगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब और देश के महान संतों, गुरुओं तथा शहीदों का संदेश हमेशा एक ही रहा है—एकता, समानता, दया और प्रत्येक मनुष्य का सम्मान। महर्षि भगवान वाल्मीकि जी ने दुनिया को समानता और धर्म का संदेश दिया तथा हमें याद दिलाया कि मानवता सबसे ऊपर है।”
पंजाब को उपजाऊ भूमि और आपसी भाईचारे की समृद्ध विरासत वाली धरती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब एक ऐसी धरती है, जहां आप कोई भी बीज बोएंगे तो वह उग जाएगा, लेकिन यहां नफरत के बीज कभी नहीं उगते। हमारे लोग प्यार, खुशी और भाईचारे के साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं। एकता की यह भावना हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें हर कीमत पर इसे बनाए रखना चाहिए।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चे भी संपन्न परिवारों के बच्चों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गरीब विद्यार्थियों को उनके हक के प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति फंड से वंचित रखा गया, जिससे जरूरतमंद परिवारों की उम्मीदों को झटका लगा और योग्य बच्चे आगे बढ़ने के अवसरों से वंचित रह गए।
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि शिक्षा सामाजिक न्याय का प्रभावी साधन बने। गरीबी के कारण किसी भी बच्चे को अवसरों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के आदर्शों का सच्चा सम्मान एक ऐसे समाज का निर्माण करके ही किया जा सकता है, जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सके और हर परिवार कड़ी मेहनत तथा शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य की उम्मीद कर सके। उन्होंने लोगों से महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाओं पर चलने और सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे तथा समानता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।






