फतेहगढ़ साहिब, 28 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): “अंतरराष्ट्रीय रिपेरियन कानून के अनुसार, जिन राज्यों में कोई दरिया या नदी बहती है और जिनके उफान तथा बाढ़ से होने वाले नुकसान को संबंधित राज्य के निवासी झेलते हैं, उस राज्य का उन नदियों के पानी पर कानूनी अधिकार होता है। संबंधित राज्य को यह स्वायत्त अधिकार होता है कि वह अपने पानी का किस प्रकार उपयोग करे और अतिरिक्त पानी किसी दूसरे राज्य को कितनी मात्रा में देना है या नहीं देना है।
इसी प्रकार, किसी राज्य में बिजली उत्पादन करने वाले हेडवर्क्स का पूर्ण नियंत्रण भी कानूनी रूप से संबंधित राज्य के पास होना चाहिए। लेकिन दुख और अफसोस की बात है कि 1966 में पंजाब के विभाजन के समय केंद्र में सत्ता पर काबिज बेईमान सरकार ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से गैर-कानूनी उपायों के माध्यम से पंजाब की नदियों के पानी और हेडवर्क्स से पैदा होने वाली बिजली का नियंत्रण अपने अधीन कर लिया। यह पंजाब राज्य और पंजाब के निवासियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय और अत्याचार था। जबकि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, जिसे अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पानी और बिजली की स्वयं बहुत अधिक आवश्यकता है। अतिरिक्त पानी होने पर ही किसी दूसरे राज्य को दिया जा सकता है, न कि जबरन छीना जा सकता है।”
ये विचार शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के मुख्य प्रवक्ता एवं राजनीतिक और मीडिया सलाहकार इकबाल सिंह टिवाणा ने व्यक्त किए। उन्होंने नदियों के पानी और हेडवर्क्स से पैदा होने वाली बिजली पर केंद्र सरकार के शासकों द्वारा समय-समय पर कथित रूप से गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करने और पंजाब के इन संसाधनों की जबरन लूट को बेहद शर्मनाक और पंजाब विरोधी कार्रवाई करार देते हुए कड़े शब्दों में निंदा की।
उन्होंने हैरानी जताई कि इन दोनों गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार के शासकों ने न्याय देने के बजाय हर कदम पर और अधिक अत्याचार तथा अन्याय किया है। इससे पंजाबियों और सिख समुदाय में भारी रोष पैदा हो चुका है। यदि इन गंभीर मामलों को उचित दृष्टिकोण अपनाकर सही ढंग से हल नहीं किया गया, तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए केंद्र सरकार को जल्द से जल्द यह अत्याचार बंद करके पंजाबियों को न्याय देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह और भी बड़ा अन्याय है कि पंजाब के पानी को राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों को लगातार कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से दिया जा रहा है। पंजाब के पानी को जबरन लेने के उद्देश्य से भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के प्रबंधन पर जहां पंजाब सरकार का नियंत्रण होना चाहिए, वहीं केंद्र सरकार ने इसका नियंत्रण जबरन अपने अधीन कर लिया है, ताकि पंजाब के पानी का दोहन किया जा सके।
इसी तरह, लंबे समय से यह नियम निर्धारित है कि पंजाबियों को उजाड़कर बनाए गए चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती का कोटा 60:40 के अनुपात में होगा। लेकिन लंबे समय से इस नियम का उल्लंघन करके पंजाबियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा चंडीगढ़ में पंजाबियों की बहुसंख्यक आबादी की जनसांख्यिकी को प्रभावित करने और चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को समाप्त करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
टिवाणा ने कहा कि केंद्र सरकार और पंजाब विरोधी ताकतों की ऐसी साजिशों को पंजाबियों तथा सिख समुदाय को समझना चाहिए। उन्होंने अपील की कि पंजाबियों को केंद्र में शासन करने वाली भाजपा-आरएसएस, कांग्रेस और अन्य ताकतों को वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में न केवल करारी हार देनी चाहिए, बल्कि पंजाब और पंथ के हितों के लिए प्रतिबद्ध पंथक पार्टियों के साझा उम्मीदवारों को जिताकर पंजाबियों की अपनी सरकार भी स्थापित करनी चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि समूचे पंजाबी समुदाय और सिख संगत अपनी इस नैतिक जिम्मेदारी को हर हाल में पूरी करेंगे।






