Wednesday, November 4, 2026
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होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर विस्फोटक हमला, इंजन रूम में लगी आग; 27 भारतीय नाविक सुरक्षित

दुबई, 31 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर एमटी लुईस-1 को निशाना बनाया गया। जहाज पर 27 भारतीय नाविक सवार थे। हमले के बाद जहाज के इंजन कक्ष में आग लग गई और कुछ समय के लिए टैंकर की संचालन क्षमता प्रभावित हुई। हालांकि चालक दल की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया और सभी 27 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
भारत सरकार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि जहाज पर मौजूद किसी भी भारतीय नागरिक को चोट नहीं आई है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जहाज प्रबंधन कंपनी के साथ संपर्क बनाए हुए है।
छोटी नाव से पहुंचे हमलावर, जहाज पर लगाए गए दो विस्फोटक उपकरण
समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह घटना 30 अक्टूबर को ओमान के खसाब तट से लगभग 25 समुद्री मील (करीब 46 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में हुई। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज से जुड़ी घटना की जानकारी दी।
समुद्री सुरक्षा से जुड़े तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस (Limpet Mines) लगा दीं। ये ऐसे विस्फोटक उपकरण होते हैं जिन्हें जहाजों के बाहरी ढांचे से चिपकाया जा सकता है।
इन विस्फोटकों के फटने के बाद जहाज के इंजन कक्ष में आग लग गई। घटना के कारण टैंकर कुछ समय के लिए संचालन करने में असमर्थ हो गया। चालक दल ने तुरंत अग्निशमन कार्रवाई की और आग पर काबू पा लिया। इसके बाद जहाज ने दोबारा अपना सफर शुरू कर दिया।
UKMTO के अनुसार, घटना में किसी के घायल होने या समुद्र में प्रदूषण फैलने की सूचना नहीं मिली। हालांकि एजेंसी ने अपनी शुरुआती सूचना में जहाज का नाम सार्वजनिक नहीं किया था। बाद में समुद्री सुरक्षा सूत्रों ने इसकी पहचान एमटी लुईस-1 के रूप में की।
एक दिन पहले दूसरे तेल टैंकर पर भी हुआ हमला
होर्मुज जलडमरूमध्य में यह अकेली घटना नहीं है। इससे एक दिन पहले, 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले विशाल कच्चे तेल के टैंकर एमटी अरजानाह  को भी निशाना बनाया गया था। इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार, दोनों जहाजों पर प्रोजेक्टाइल यानी किसी प्रकार के प्रक्षेपास्त्र या उड़ने वाले हथियार से हमले किए गए। दोनों घटनाओं में कुल 29 भारतीय नाविक और नागरिक सवार थे और सभी सुरक्षित हैं।
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत सरकार दोनों घटनाओं पर नजर रख रही है। संबंधित जहाज प्रबंधन कंपनियों के साथ समन्वय किया जा रहा है, ताकि भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली
इन हमलों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी संगठन या देश ने अब तक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि भारत सरकार ने दोनों घटनाओं को प्रोजेक्टाइल हमलों के रूप में बताया है, जबकि एमटी लुईस-1 पर लिंपेट माइंस लगाए जाने की जानकारी समुद्री सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसलिए हमले के तरीके और इसके पीछे जिम्मेदार पक्ष को लेकर जांच तथा स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के तेल निर्यात के लिए यह मार्ग बेहद अहम है।
इस संकरे समुद्री रास्ते में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। इसी कारण यहां होने वाली किसी भी सुरक्षा घटना पर दुनिया भर के समुद्री व्यापार से जुड़े संगठनों और सरकारों की नजर रहती है।
छोटी नावों से हमले की रणनीति बनी समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती
ग्रीस की समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी मैरिस्कस ने भी छोटी नौकाओं के माध्यम से जहाजों के नजदीक पहुंचकर विस्फोटक उपकरण लगाने की रणनीति को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े वाणिज्यिक टैंकरों के आसपास छोटी नौकाओं की गतिविधियों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कम लागत वाले विस्फोटक उपकरणों का इस्तेमाल समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद होर्मुज क्षेत्र में लिंपेट माइंस के इस्तेमाल से किसी जहाज को निशाना बनाने का यह पहला ज्ञात सफल मामला है। इससे पहले सितंबर में भी इस तरह की कोशिश की सूचना आई थी, लेकिन उस समय विस्फोटक उपकरण सक्रिय नहीं हुए थे।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि दोनों टैंकरों पर सवार सभी 29 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं।
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