पेरिस, 31 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): यूरोप के दो प्रमुख देशों फ्रांस और जर्मनी में शनिवार को विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फ्रांस में हैलोवीन त्योहार के दौरान संभावित विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं, जर्मनी में युवाओं के नेतृत्व में 21 शहरों में विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी है।
इन प्रदर्शनों के प्रमुख मुद्दे महंगाई, सरकारी खर्चों में कटौती और सामाजिक असमानता हैं। फ्रांस में अधिकारियों को आशंका है कि हैलोवीन के दौरान लोगों द्वारा पहने जाने वाले मास्क और विभिन्न प्रकार की वेशभूषा की आड़ में कुछ प्रदर्शनकारी अपनी पहचान छिपा सकते हैं, जिससे हिंसक घटनाओं को रोकना मुश्किल हो सकता है। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने देश में अशांति फैलने के खतरे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था से सख्ती से निपटा जाएगा।
अधिकारियों ने इस बार भी लगभग 70 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है, जो पिछले सप्ताह की सुरक्षा व्यवस्था के बराबर है। यह कदम 17 अक्टूबर को हुई हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाया गया है। संभावित तोड़फोड़ और नुकसान की आशंका के चलते देश के कई हिस्सों में दुकानदारों और कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठानों के शीशों और दुकानों के सामने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। फ्रांस के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एलेन डी क्रेसेंजो ने भी कारोबारियों की चिंता जाहिर की है। दूसरी ओर, जर्मनी में ‘Gen Z regelt’ नामक युवा अभियान के तहत बर्लिन, कोलोन, हैम्बर्ग और म्यूनिख सहित 21 शहरों में प्रदर्शन किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों में हजारों युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है। प्रदर्शनकारी स्कूलों की खराब स्थिति, सरकारी खर्चों में कटौती, बढ़ती महंगाई, सामाजिक असमानता, अनिवार्य सैन्य भर्ती और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे उठाएंगे।
इस अभियान के आयोजकों ने फ्रांस में पहले हुई हिंसा से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ है। जर्मन पुलिस ने भी कहा है कि वह लोगों के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अपने विचार व्यक्त करने के अधिकार की रक्षा करेगी। हालांकि, पुलिस को आशंका है कि कुछ कट्टरपंथी या शरारती तत्व प्रदर्शनों में शामिल होकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर सकते हैं।
फ्रांस में बजट और आर्थिक संकट को लेकर बढ़ा विरोध
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों को सितंबर के अंत में उस समय और समर्थन मिला, जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अल्पमत सरकार ने वर्ष 2027 के बजट पर चर्चा शुरू की। देश का सार्वजनिक कर्ज आर्थिक उत्पादन के लगभग 120 प्रतिशत तक पहुंचने और कर्ज लेने की लागत बढ़ने के कारण सरकार पर खर्च कम करने का दबाव है।
विद्यार्थी स्कूलों की खराब स्थिति, कक्षाओं में अधिक भीड़ और दाखिला प्रणाली को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। इस अभियान में ट्रेड यूनियनों और ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े लोग भी शामिल हो रहे हैं।
जर्मनी में भी युवाओं की नाराजगी का मुख्य कारण बढ़ती कीमतें, स्कूलों में कमजोर सुविधाएं, सरकारी बजट में कटौती और युवा पीढ़ी की चिंताओं को राजनीतिक फैसलों में पर्याप्त महत्व नहीं मिलना है।
यूरोप के कई देशों में युवाओं के नेतृत्व में उभर रहे ऐसे आंदोलन महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक असमानता और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को लेकर बढ़ती बेचैनी को दर्शाते हैं।






