संगरूर, 1 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के प्रसार शिक्षा निदेशालय और आईसीएआर-अटारी, जोन-1, लुधियाना के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दिखाने के लिए विशेष आयोजन किया गया। इसमें जिले के विभिन्न गांवों से 130 किसानों और महिला किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सुना और कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में किसानों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें कृषि और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कृषि लागत कम करना और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करना भी जरूरी है। किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुसार आधुनिक और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने तथा कृषि विशेषज्ञों के संपर्क में रहने का सुझाव दिया गया।
लाइव प्रसारण के दौरान पीएम-किसान योजना की 24वीं किस्त के तहत देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई। इस अवसर पर कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 521 परियोजनाओं और उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 12 बागवानी क्लस्टरों का भी उद्घाटन किया गया।
इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र में डॉ. मनदीप सिंह ने किसानों को ‘खेत बचाओ अभियान’ की जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार निर्धारित मात्रा में करने, मिट्टी की सेहत बनाए रखने तथा पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करने पर जोर दिया।
केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ. रविंदर कौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. वितस्ता और डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह धालीवाल ने फसल उत्पादन, फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और एकीकृत कीट प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने तिलहन और दलहन की खेती, मिट्टी की सेहत तथा जैविक खेती से जुड़े किसानों के सवालों के जवाब भी दिए।
कार्यक्रम में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के तहत आए विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।






