चंडीगढ़, 02 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राज्य के सात जिलों के प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी, पुलिस कार्रवाई और मशीनरी की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।
सी.ए.क्यू.एम के सदस्य सचिव तरुण पीथोड़े की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में फरीदकोट, फिरोजपुर, बरनाला, बठिंडा, पटियाला, मलेरकोटला और संगरूर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं में हालिया वृद्धि की समीक्षा करना और जिलों में रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों का आकलन करना था।
शाम के समय निगरानी पर विशेष जोर
आयोग ने जिला प्रशासन को विशेष रूप से शाम के समय खेतों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि इस दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अधिकारियों से कहा गया है कि जहां भी खेतों में आग लगाने की सूचना मिले, वहां तत्काल जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बेलर और कृषि मशीनों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश
बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। CAQM ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के लिए उपलब्ध बेलर और अन्य कृषि मशीनों की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि धान की पराली को खेतों में जलाने के बजाय इकट्ठा करके उसका उचित प्रबंधन किया जा सके।
इसके साथ ही किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान तेज करने और कृषि विभाग, प्रशासन तथा पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा गया है।
वायु प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी है सामूहिक प्रयास
गौरतलब है कि धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेष को जलाने से निकलने वाला धुआं उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की समस्या को बढ़ाता है। विशेषकर सर्दियों के मौसम में प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
सी.ए.क्यू.एम. की इस समीक्षा का उद्देश्य पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, खेतों में निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावी बनाना है। अब इन सात जिलों के प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाई जाए।






