वाशिंगटन, 3 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ईरान के क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने सोमवार को इस द्वीप पर एक गुप्त सैन्य अभियान चलाया। इसे हाल के सप्ताहों में ईरान के खिलाफ की गई सीमित सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता संभव है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि पेट्रोलियम की कीमतों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है और ईरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है। उन्होंने लिखा, “ईरान समझौता चाहता है, जितनी जल्दी हो सके। यह हो सकता है!”
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि वाशिंगटन ने सैन्य हमलों का दायरा सीमित रखा और अभियान से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखी, ताकि यह संदेश न जाए कि अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
क़ेशम द्वीप पर कई धमाकों की खबर
इस बीच, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने क़ेशम द्वीप पर कई धमाकों की सूचना दी है। रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह द्वीप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद अहम मार्ग है।
पत्रकारों द्वारा ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले की संभावना को लेकर पूछे जाने पर ट्रंप ने मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद जवाबी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया। उन्होंने इस सवाल के जवाब में ‘नहीं’ कहा।
ईरान का दावा- अमेरिकी ड्रोन को सुरक्षित कब्जे में लिया
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में अमेरिका के चौथे जासूसी एवं डिकॉय ड्रोन को सुरक्षित रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, ईरानी नौसेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई ने सोमवार को MQM-170 ड्रोन की पहचान की और उसके गाइडेंस तथा कंट्रोल सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके बाद ड्रोन को बिना किसी भौतिक नुकसान के नीचे उतार लिया गया।
ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि इस ड्रोन का इस्तेमाल फारस की खाड़ी के तटीय इलाकों और क़ेशम द्वीप पर स्थित वायु रक्षा प्रणालियों की निगरानी तथा उनकी मैपिंग के लिए किया जा रहा था।
क्या है MQM-170 ड्रोन की खासियत?
MQM-170 आउटला ड्रोन का निर्माण अमेरिका की ग्रिफिन एयरोस्पेस कंपनी ने किया है। इसका प्रमुख उद्देश्य हवाई खतरों की नकल करना, वायु रक्षा प्रणालियों की क्षमता का परीक्षण करना और सैन्य प्रशिक्षण अभ्यासों में इस्तेमाल होना है। इस प्रकार के ड्रोन का उपयोग रक्षा प्रणालियों की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को परखने वाले अभ्यासों में भी किया जाता है।
जून में भी क़ेशम द्वीप को बनाया गया था निशाना
गौरतलब है कि अमेरिका ने इससे पहले 2 जून को भी क़ेशम द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की थी। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि द्वीप पर स्थित एक सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को निशाना बनाया गया था। इस स्टेशन का इस्तेमाल ड्रोन उड़ानों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने उस समय कहा था कि उसकी सेनाओं ने वाणिज्यिक जहाजों की ओर बढ़ रहे तीन एकतरफा हमलावर ड्रोन को रोक दिया था। इसके अलावा मध्य पूर्व के विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की ओर से भेजे गए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रोकने का दावा किया गया था।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने क़ेशम द्वीप पर ड्रोन नियंत्रण केंद्र के खिलाफ की गई कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया था।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की चर्चाओं के साथ-साथ सैन्य गतिविधियों और ड्रोन से जुड़े इन घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि, क़ेशम द्वीप पर सोमवार को हुई कथित अमेरिकी कार्रवाई के संबंध में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि का विवरण उपलब्ध नहीं है।