पटियाला, 7 जुलाई
फायर सेफ्टी केवल भवनों में अग्निशमन सिलेंडर लगाने या सेफ्टी प्रमाणपत्र लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, अभ्यास और मॉक ड्रिल के माध्यम से ही जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। यह विचार फर्स्ट एड, सेफ्टी एवं स्वास्थ्य जागरूकता मिशन के मुख्य प्रशिक्षक काका राम वर्मा ने मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पटियाला में आयोजित फायर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि अनेक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संस्थान अग्निशमन सिलेंडर लगाकर और सेफ्टी प्रमाणपत्र प्राप्त कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के दिशा-निर्देशों एवं सुप्रीम कोर्ट की सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी के अनुसार वर्ष में कम से कम दो बार फर्स्ट एड, फायर सेफ्टी, अग्निशमन सिलेंडरों के उपयोग, यातायात नियमों तथा आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण और एक बार मॉक ड्रिल आयोजित की जानी चाहिए।

काका राम वर्मा ने कहा कि आग, गैस रिसाव, बिजली या पेट्रोलियम से जुड़ी दुर्घटनाओं के दौरान शुरुआती दो मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लोग सही तरीके से प्रशिक्षित हों तो बड़े हादसों और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान डेडिकेटेड ब्रदर्स ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. राकेश वर्मी ने भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को आग लगने के कारणों, आग की विभिन्न श्रेणियों, अग्निशमन सिलेंडरों के सही उपयोग, गैस रिसाव की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों, बिजली के करंट से बचाव तथा आपातकाल में नाक और मुंह पर गीला कपड़ा बांधकर वेंटिलेटर पोजीशन में रहने और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य मनप्रीत शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में आपदा प्रबंधन, फर्स्ट एड और फायर सेफ्टी का प्रशिक्षण प्रत्येक विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों को भी फर्स्ट एड, सीपीआर, फायर सेफ्टी, अग्निशमन सिलेंडरों के उपयोग, आपदा प्रबंधन तथा सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों ने ऐसी जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया।






