Thursday, August 27, 2026
HomeNationalसंजीव जैन उत्तर कोरिया में भारत के अगले राजदूत नियुक्त

संजीव जैन उत्तर कोरिया में भारत के अगले राजदूत नियुक्त

Sanjeev Jain Ambassador North Korea,

नई दिल्ली, 7 जुलाई (दीपक दत्ता): विदेश मंत्रालय (MEA) ने संजीव जैन को डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK), जिसे उत्तर कोरिया के रूप में भी जाना जाता है, में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि जैन जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे। भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 2008 बैच के अधिकारी, संजीव जैन वर्तमान में रिपब्लिक ऑफ काबो वर्डे (Republic of Cabo Verde) में भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

जैन, आलियावती लोंगकुमेर (Aliawati Longkumer) का स्थान लेंगे, जो इस समय उत्तर कोरिया में भारत की राजदूत के रूप में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति 16 जून, 2025 को इस पद पर हुई थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और उत्तर कोरिया के संबंध आमतौर पर दोस्ती, सहयोग और आपसी समझ वाले रहे हैं। उत्तर कोरिया के साथ काउंसलर (दूतावास संबंधी) संबंध मार्च 1962 में स्थापित किए गए थे।

मंत्रालय के मुताबिक, 1968 में उत्तर कोरिया में भारत का वाणिज्य दूतावास (कौंसलेट जनरल) स्थापित किया गया था, और दोनों देशों के बीच दूतावास स्तर पर राजनयिक (डिप्लोमैटिक) संबंध 10 दिसंबर, 1973 को कायम हुए थे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1950-1953 के कोरियाई युद्ध के बाद, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भारत की अध्यक्षता में एक 9-सदस्यीय ‘न्यूट्रल नेशंस रिपेट्रिएशन कमीशन’ (तटस्थ देश वापसी आयोग) का गठन किया था। मेजर जनरल के. एस. थिमैया की अध्यक्षता में युद्ध बंदियों (POWs) की अदला-बदली में इस आयोग की भूमिका की काफी सराहना की गई थी।

आपसी हितों और चिंताओं के द्विपक्षीय मुद्दों पर विचारों का नियमित और सार्थक आदान-प्रदान फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन (FOC) के तंत्र के माध्यम से किया जाता है।

विदेश मंत्रालय ने अपने एक पिछले बयान में नोट किया था कि भारत ने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को कम करने के लिए उत्तर कोरिया से परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों से बचने की अपील की थी। भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता लाने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

इससे पहले, भारत ने 27 अप्रैल 2018 को पनमुंजोम (Panmunjom) में और सितंबर 2018 में प्योंगयांग (Pyongyang) में हुई अंतर-कोरियाई शिखर सम्मेलन बैठक का स्वागत किया था।

भारत ने सिंगापुर में 12 जून 2018 को और हनोई में 27-28 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता का भी स्वागत किया था। भारत ने उम्मीद जताई थी कि ऐसी बातचीत तनाव को कम करने और कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति और सुलह का रास्ता साफ करने में मदद करेगी।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments