पंचकूला, 27 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को पंचकूला में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 के पदक विजेताओं और प्रतिभागियों के राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 24 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा, खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम, सांसद श्रीमती रेखा शर्मा, मेयर श्री श्याम लाल बंसल, खेल विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी. कुमार, खेल विभाग के निदेशक श्री पार्थ गुप्ता, खिलाड़ी और उनके परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी की कहानी पदक से शुरू नहीं होती। उसकी कहानी उस मिट्टी से शुरू होती है, जहां उसने पहली बार दौड़ना सीखा, उस मैदान से जहां उसने पहली बार हार का सामना किया और उन सुबहों से, जब बाकी दुनिया सो रही होती है और वह अपने सपने के लिए पसीना बहा रहा होता है। उसके पीछे माता-पिता का विश्वास, गुरु का अनुशासन और हर हार के बाद फिर उठ खड़े होने का संकल्प होता है। पोडियम पर खड़ा खिलाड़ी कुछ पलों के लिए पूरी दुनिया को दिखाई देता है, लेकिन उस पोडियम तक पहुंचने का वर्षों का संघर्ष दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि ग्लासगो में हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपने दमखम और प्रतिभा का डंका पूरी दुनिया में बजाया है। आज हर हरियाणवी का सीना गर्व से चौड़ा है और खिलाड़ियों की उपलब्धियों की खुशी पूरे हरियाणा में उत्सव के रूप में छाई हुई है। हरियाणा की मिट्टी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां खेतों में सिर्फ अन्न नहीं उगता, बल्कि चैंपियन भी पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में हरियाणा की हिस्सेदारी महज 2 प्रतिशत है, लेकिन इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले 122 खिलाड़ियों में से 24 खिलाड़ी हरियाणा के थे और इनमें से लगभग हर दूसरा खिलाड़ी पदक लेकर लौटा। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रकार देश की कुल पदक संख्या में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान 28 प्रतिशत से अधिक रहा है। यह महज आंकड़ा नहीं है, बल्कि हरियाणा की खेल प्रतिभा, मेहनत और जुझारूपन की वह शक्ति है, जिसने दुनिया के मंच पर एक बार फिर तिरंगे की शान बढ़ाई है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पौने तीन करोड़ जनता और अपनी ओर से ग्लासगो में तिरंगा ऊंचा करने वाले हरियाणा के पदक विजेताओं तथा प्रत्येक प्रतिभागी खिलाड़ी का दिल की गहराइयों से अभिनंदन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के माता-पिता और प्रशिक्षकों (कोचों) को भी बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने कदम-कदम पर खिलाड़ियों का साथ दिया है।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। आज हम सिर्फ पदकों का सम्मान नहीं कर रहे, बल्कि उस तपस्या, संघर्ष और संकल्प का सम्मान कर रहे हैं, जिसने इन पदकों को जन्म दिया है। किसी खिलाड़ी के गले में आने वाला पदक केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, उसमें उसके परिवार का त्याग, गुरु का मार्गदर्शन और पूरे प्रदेश की उम्मीदें भी शामिल होती हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों के बलबूते भारत दुनिया की एक बड़ी खेल शक्ति के रूप में उभरेगा। आज ग्लासगो में खिलाड़ियों ने तिरंगा ऊंचा किया है और आने वाले वर्षों में वे ओलंपिक के पोडियम पर भी तिरंगा ऊंचा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 23वें कॉमनवेल्थ खेलों में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। यह खिलाड़ियों की इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण का परिणाम है। इस गौरवपूर्ण अभियान में हरियाणा ने एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है।

हरियाणा की बेटियों ने जीते 6 पदक, इनमें 5 स्वर्ण पदक शामिल
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रदेश की बेटियों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते गए 11 पदकों में से 6 पदक बेटियों के हैं, जिनमें 5 स्वर्ण पदक शामिल हैं। मुक्केबाजी रिंग में भी हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा रहा और भारत के 7 स्वर्ण पदकों में से 6 स्वर्ण पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते।
उन्होंने कहा कि प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घणघस, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर स्वर्णिम इतिहास रचा है।
पैरा-एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली बेटी शर्मिला का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि मन की शक्ति के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में रजत पदक हासिल कर अपनी विश्वस्तरीय प्रतिभा को फिर से प्रमाणित किया है। मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया और बेटी सीमा कालीरमण ने कांस्य पदक हासिल कर हरियाणा की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग मैदानों में खेलते हुए एक ही तिरंगे को ऊंचा किया है।
सिर्फ पदकों का नहीं, खिलाड़ियों की तपस्या, संघर्ष और संकल्प का भी सम्मान – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का सम्मान सिर्फ पदक विजेताओं का नहीं है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी खिलाड़ी का योगदान हमारे लिए समान रूप से गौरवपूर्ण है। खेल में पदक जीतना निश्चित रूप से बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच देश की जर्सी पहनकर मैदान में उतरना भी अपने आप में असाधारण सम्मान है।
उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी आज पदक लेकर लौटे हैं, वे हमारी उपलब्धि हैं और जो खिलाड़ी अनुभव लेकर लौटे हैं, वे हमारी अगली उपलब्धि की नींव हैं। आज का अनुभव कल का पदक बन सकता है। सरकार, खेल विभाग और पूरा हरियाणा खिलाड़ियों के साथ खड़ा है।
खिलाड़ी देश के लिए खेले तो उसे अपने भविष्य की चिंता न हो : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच स्पष्ट है कि जब खिलाड़ी देश के लिए खेले तो उसे यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि खेल के बाद उसका भविष्य क्या होगा। इसलिए सरकार की नीतियां सिर्फ पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ी को सम्मान, सुरक्षा और अवसर देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए सरकारी सेवाओं के अवसर, खेल अकादमियां, खेल नर्सरियां, प्रशिक्षण सुविधाएं और आधुनिक खेल ढांचे का निरंतर विस्तार इसी सोच का प्रमाण हैं।
अब तक 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को दी गईं सरकारी नौकरियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियमों के तहत अब तक 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, बी और सी की सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किया गया है। अब हरियाणा स्टेट गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी खेल ग्रेडेशन का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें सरकारी नौकरियों सहित अन्य अवसरों का भी लाभ मिलेगा।
पिछले लगभग 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज 24 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए हैं। यह सिर्फ आज का ऐलान नहीं है। पिछले लगभग 12 वर्षों में प्रदेश के 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों को तैयारी के लिए पहले ही धनराशि देने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि पैसे की कमी के कारण किसी भी खिलाड़ी का प्रशिक्षण न रुके।
सरकार ने पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों के मासिक मानदेय में भी वृद्धि की है। अब खेल रत्न, द्रोणाचार्य, अर्जुन, ध्यानचंद और तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार विजेताओं को प्रति माह 20 हजार रुपये और भीम पुरस्कार विजेताओं को प्रति माह 5 हजार रुपये का मानदेय दिया जा रहा है।
लक्ष्य सिर्फ आज के चैंपियनों का सम्मान करना नहीं, बल्कि कल के चैंपियन तैयार करना भी है – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ आज के चैंपियनों का सम्मान करना नहीं, बल्कि कल के चैंपियन तैयार करना भी है। खिलाड़ी का यह सफर गांव की मिट्टी, स्कूल के मैदान और स्थानीय खेल नर्सरी से शुरू होता है। इसी सोच के साथ खेल प्रतिभाओं को खोजने और तराशने के लिए प्रदेश में 2 हजार खेल नर्सरियां खोली गई हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिभा को अवसर के साथ-साथ आर्थिक सहयोग की भी जरूरत होती है। इसलिए 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1,500 रुपये और 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के खिलाड़ियों को 2,000 रुपये मासिक वजीफा देने का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में 25 आवासीय खेल अकादमियां भी खोली गई हैं। इनमें प्रत्येक खिलाड़ी को 500 रुपये प्रतिदिन की दर से डाइट मनी दी जा रही है।
खेल बुनियादी ढांचे पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च, बजट बढ़ाकर 668.42 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा को अवसर और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ विश्वस्तरीय सुविधाओं की भी आवश्यकता होती है। खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए मजबूत खेल बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 12 वर्षों में करीब 1,100 करोड़ रुपये खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए गए हैं। खेल विभाग का बजट बढ़ाकर 668 करोड़ 42 लाख रुपये कर दिया गया है, जो वर्ष 2013-14 में सिर्फ 163 करोड़ रुपये था।
चोट के बाद खिलाड़ी को वापसी का भरोसा देने के लिए स्थापित किया गया ‘ए-स्टार’ केंद्र
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी घायल होता है तो उसका करियर दांव पर लग जाता है। खिलाड़ियों के इस दर्द को दूर करने और चोट के बाद उन्हें वापसी का भरोसा देने के लिए पंचकूला के ताऊ देवी लाल खेल परिसर में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय स्तर का ‘ए-स्टार’ उन्नत वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। यह उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला और सबसे आधुनिक केंद्र है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को बचपन से ही तराशने की नीति पर काम कर रही है और उनकी तैयारियों के लिए हर कदम पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि हरियाणा की मिट्टी से शुरू होने वाली किसी भी प्रतिभा का सफर संसाधनों की कमी के कारण बीच में न रुके और वह सफर दुनिया के पोडियम तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने भी अपनी मेहनत से साबित कर दिया है कि वे ऐसे प्रोत्साहन और सुविधाओं के हकदार हैं। खिलाड़ियों ने हर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के बाद प्रदेश को जश्न मनाने का अवसर दिया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी अगली जीत की तैयारी में भी उनके साथ खड़ी रहे। कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 का यह उत्सव जैसा माहौल उसी विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स भारत की बढ़ती खेल शक्ति दिखाने का अवसर – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में देश के सामने एक और बड़ा अवसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को मिली है। यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने भारत की बढ़ती खेल शक्ति को दिखाने का अवसर है।
श्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ी भारत को दुनिया की बड़ी खेल शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आज ग्लासगो में खिलाड़ियों ने तिरंगा ऊंचा किया है और आने वाले वर्षों में वे ओलंपिक के पोडियम पर भी तिरंगा ऊंचा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उनके गले में जो पदक हैं, वे उनकी मंजिल नहीं, बल्कि अगली उड़ान की शुरुआत हैं। जिस मिट्टी से उन्होंने अपने सपने की पहली लकीर खींची थी, उसी मिट्टी से अब दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों तक अपनी पहचान लिखनी है। आज ग्लासगो में तिरंगा उनके हाथों से ऊंचा हुआ है और कल यही तिरंगा ओलंपिक के पोडियम पर और ऊंचा लहराए, यही हर हरियाणवी का सपना और हर भारतीय की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने खेल विभाग, सभी कोचों, अभिभावकों और विशेष रूप से सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा, “थक कर जो भी रुके नहीं, वही सफर की पहचान बना, गिरकर जिसने उठना सीखा, वह आज हिंदुस्तान बना। मंजिल मिली तो क्या हुआ, अब राह नई बनानी है। एक जीत मिली है आज, कल दुनिया जीतकर आनी है।”
खिलाड़ियों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, संघर्ष और सफलता के सफर को करीब से जाना
सम्मान समारोह के बाद मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों से विशेष रूप से बातचीत की। मुख्यमंत्री खिलाड़ियों के बीच पहुंचे और उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के उनके खेल सफर, कड़ी मेहनत, संघर्ष और इस दौरान आई चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
खिलाड़ियों ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा करते हुए बताया कि किस तरह वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच तक का सफर तय किया और देश के लिए पदक जीतने में सफलता हासिल की।
बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री के सामने अपने खेल जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए और प्रदेश में खिलाड़ियों को मिल रहे प्रोत्साहन एवं सहयोग के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं और अन्य आवश्यक सहयोग के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों की हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है। सरकार से मिले इस सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इसी का परिणाम है कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें आगे भी इसी समर्पण और जज्बे के साथ देश के लिए खेलते हुए नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहयोग एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
हरियाणा की खेल नीति का पूरे देश में बज रहा डंका, दूसरे प्रदेश भी कर रहे पालन – महीपाल ढांडा
शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एक ऐसे संवेदनशील व्यक्ति हैं, जिन्होंने इस तरह के अवसरों पर कभी राजनीति नहीं की, बल्कि राजनीति को सेवा का माध्यम बनाकर प्रदेश और देश के युवाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है। युवाओं और खिलाड़ियों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। इसी सोच का परिणाम है कि प्रदेश के बच्चों की प्रतिभा को बचपन से पहचानकर उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है और मुख्यमंत्री स्वयं इसकी व्यवस्था की चिंता करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की सुविधा या संसाधन की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्हें प्रदेश के युवाओं और उनके भविष्य की बहुत चिंता है। जब हरियाणा के खिलाड़ियों ने पदक जीते तो मुख्यमंत्री के चेहरे पर दिखाई दिया गर्व और खुशी इस बात का प्रमाण था कि वे खिलाड़ियों की उपलब्धियों को कितनी आत्मीयता से देखते हैं।
श्री महीपाल ढांडा ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि हरियाणा की खेल नीति का आज पूरे देश में डंका बज रहा है और दूसरे प्रदेश भी हरियाणा की खेल नीति का अनुसरण करने लगे हैं। उन्होंने हरियाणा के खिलाड़ियों और उनके परिवारों का अभिनंदन एवं स्वागत किया तथा खिलाड़ियों की मेहनत, उत्साह और जोश की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हम सभी के सामने यह संकल्प रखा है कि भारत की प्रत्येक प्रतिभा, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, अपना शत-प्रतिशत योगदान दे और वर्ष 2047 तक भारत को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल करने में अपनी भूमिका निभाए। हरियाणा के खिलाड़ियों ने इस दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाए हैं।
शिक्षा मंत्री ने कार्यक्रम में आए छोटे बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वे भी अपनी मेहनत और अनुशासन के बल पर भविष्य में देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी प्रदेश के बच्चों और युवाओं को कभी निराश नहीं होने देंगे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हरसंभव सहयोग एवं अवसर उपलब्ध कराते रहेंगे।






