सुनाम, 30 अगस्त, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर की ओर से गांव खेतला, ब्लॉक सुनाम, जिला संगरूर के किसानों के लिए फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन संबंधी पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गांव के कुल 25 किसानों ने भाग लिया।
डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पीएयू-केवीके, संगरूर ने किसानों को धान की पराली का खेत में ही प्रबंधन करने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और भूमि की सेहत को ध्यान में रखते हुए पराली जलाने की प्रथा को छोड़ने की अपील की। उन्होंने पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया और पराली को मिट्टी में मिलाने के लाभों पर प्रकाश डाला।

डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग) ने पराली के खेत में ही प्रबंधन (इन-सीटू) की विभिन्न तकनीकों और मशीनरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा उनकी कार्यप्रणाली के बारे में बताया। उन्होंने पराली के खेत से बाहर प्रबंधन (एक्स-सीटू) के तरीकों और उपलब्ध मशीनरी की जानकारी भी साझा की। उन्होंने किसानों को धान की पराली के टिकाऊ प्रबंधन के लिए इन-सीटू तरीकों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने पराली के इन-सीटू प्रबंधन वाले खेतों में गेहूं की सफल खेती के लिए कृषि तकनीकों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी और विभिन्न प्रबंधन विधियों के अनुसार सिफारिशें साझा कीं। उन्होंने ऐसे खेतों में गुलाबी तना छेदक और सैनिक कीट की रोकथाम के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने किसानों को बागों तथा हल्दी और लहसुन जैसी फसलों में धान की पराली को मल्च के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन और गेहूं की खेती से संबंधित पीएयू का साहित्य भी वितरित किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों के फसल अवशेष प्रबंधन, मशीनरी और फसल उत्पादन से संबंधित सवालों के जवाब भी दिए।





