फतेहगढ़ साहिब, 3 सितंबर, 2026 (प्रभजोत सिंह): जिला मजिस्ट्रेट फतेहगढ़ साहिब डॉ. सोना थिंद ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जिले में ध्वनि प्रदूषण रोकने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आदेश के अनुसार राजनीतिक पार्टियों, संगठनों, एनजीओ, निजी, सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा जलसे, रैलियां, धरने अथवा अन्य कार्यक्रम आयोजित करते समय लाउडस्पीकर आदि चलाने के लिए संबंधित उप मंडल मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा। इसी तरह विवाह समारोहों में मैरिज पैलेस, क्लब, होटल और खुले स्थानों पर डीजे, ऑर्केस्ट्रा या संगीत यंत्र बिना अनुमति के नहीं चलाए जा सकेंगे।
अनुमति मिलने के बावजूद रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या किसी अन्य ध्वनि/संगीत यंत्र को चलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। ध्वनि की सीमा कार्यक्रम स्थल, धार्मिक स्थल या भवन की चारदीवारी के दायरे तक ही सीमित रखनी होगी।
निर्देशों के अनुसार ध्वनि की अधिकतम सीमा औद्योगिक क्षेत्रों में दिन के समय 75 डेसिबल और रात में 70 डेसिबल, वाणिज्यिक क्षेत्रों में क्रमशः 65 और 55 डेसिबल, रिहायशी क्षेत्रों में 55 और 45 डेसिबल, जबकि साइलेंस जोन में 50 और 40 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे पटाखों के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर भी पूरी रोक होगी, जिनसे निर्धारित सीमा से अधिक 125 डीबी (एआई) और 145 डीबी (सी) पीके की आवाज पैदा होती हो या अत्यधिक धुआं निकलता हो। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे चलाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी स्थान या वाहन में हॉर्न बजाने पर रोक रहेगी। प्रेशर हॉर्न और ध्वनि प्रदूषण पैदा करने वाले अन्य हॉर्न के निर्माण और बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
सार्वजनिक स्थानों, इमारतों, सिनेमा, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट और मेलों के आयोजकों द्वारा तेज आवाज और अत्यधिक शोर पैदा करने वाले संगीत तथा अश्लील गीत चलाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
जिले के सभी उप मंडल मजिस्ट्रेट अपनी-अपनी सब-डिवीजन में ध्वनि प्रदूषण रोकने संबंधी आदेश जारी करेंगे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा भारत सरकार के ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 का सख्ती से पालन करवाएंगे।
ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायत मिलने पर उप मंडल मजिस्ट्रेट संबंधित डीएसपी और पर्यावरण इंजीनियर के साथ तालमेल कर जांच करवाएंगे। शिकायत सही पाए जाने पर अदालत के आदेशों के अनुसार ध्वनि प्रदूषण पैदा करने वाले उपकरण को हटाकर कब्जे में लिया जाएगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण इंजीनियर उप मंडल मजिस्ट्रेट को तकनीकी सहयोग देंगे और विभिन्न विभागों, जिला रेड क्रॉस सोसायटी, सामाजिक संस्थाओं, रोटरी क्लबों आदि के सहयोग से ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए जागरूकता कैंप, होर्डिंग और बैनर भी लगाए जाएंगे।
पटाखा फैक्ट्रियों को निर्धारित आवाज, धमक और आकार वाले पटाखे ही तैयार करने होंगे। निर्धारित सीमा से अधिक आवाज या धमक पैदा करने वाले, पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले तथा प्रतिबंधित विस्फोटक सामग्री वाले पटाखों के निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी। पटाखों की पैकिंग और उत्पाद पर इस्तेमाल की गई सामग्री की मात्रा, आकार तथा आवाज और धमक का डेसिबल विवरण लिखना अनिवार्य होगा। उल्लंघन करने पर संबंधित पटाखा फैक्ट्री के मालिक और प्रबंधक के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश सरकारी मशीनरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लागू नहीं होगा। आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जिले में ये आदेश 28 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेंगे।






