Sunday, September 6, 2026
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कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने सी.आर.एम. प्रोजेक्ट के तहत पराली प्रबंधन संबंधी जागरूकता कैंप लगाया

संगरूर, 6 सितंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): धान की पराली न जलाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा गांव फुम्मण सिंह वाला, ब्लॉक भवानीगढ़ में एक दिवसीय किसान जागरूकता कैंप लगाया गया। इसमें गांव के सरपंच स. सुखचैन सिंह सहित लगभग 70 किसानों ने भाग लिया।

इस अवसर पर डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पी.ए.यू.-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने किसानों को धान की पराली जलाने से पर्यावरण, मिट्टी की सेहत और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर तत्व का नुकसान होता है। इसके साथ ही पराली जलाने से पैदा होने वाली हानिकारक गैसें पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं और मनुष्यों में विभिन्न बीमारियों का कारण बनती हैं।

उन्होंने किसानों से पराली जलाने के बजाय इसे खेत में ही प्रबंधित करने की तकनीकें अपनाने की जोरदार अपील की। उन्होंने खेत में पराली प्रबंधन से होने वाले लाभों और मिट्टी की सेहत में होने वाले सुधार के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान की पराली को खेत में जुताई करके मिलाने से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है, रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम होता है और फसल की पैदावार बढ़ती है। इसके अलावा उन्होंने गेहूं की नई किस्म पी.बी.डब्ल्यू. 887 के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सितंबर महीने के दौरान आयोजित किए जा रहे किसान मेलों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।

डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने किसानों को खेत में पराली का प्रबंधन करके गेहूं की बुवाई करने वाली मशीनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पराली को खेत में मिलाकर बोई गई गेहूं की फसल में खरपतवारों की रोकथाम और पोषक तत्वों की पूर्ति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान में पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) के इस्तेमाल के लाभ बताते हुए इसका छिड़काव करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब धान गोभ अवस्था में आए तो 1.5 प्रतिशत पोटैशियम नाइट्रेट (3 किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट 200 लीटर पानी प्रति एकड़) का छिड़काव करें।

डॉ. रविंदर कौर, एसोसिएट प्रोफेसर (बागवानी) ने किसानों को सर्दियों के मौसम में घरेलू सब्जी बगीचा लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सब्जियों की विभिन्न किस्मों के बारे में भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा किसानों के लिए तैयार की जाने वाली सब्जियों की पौध के संबंध में भी जानकारी साझा की।

कैंप के अंत में किसानों के सवालों के जवाब दिए गए तथा उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा तैयार सर्दियों की सब्जियों के बीजों की किटें और कृषि साहित्य उपलब्ध करवाया गया।

गांव के सरपंच स. सुखचैन सिंह और किसान यूनियन के अध्यक्ष ने कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की टीम का तहेदिल से धन्यवाद किया।

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