Tuesday, September 29, 2026
HomePunjabकृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने सी.आर.एम. प्रोजेक्ट के तहत गांव बालियां में...

कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने सी.आर.एम. प्रोजेक्ट के तहत गांव बालियां में ब्लॉक स्तरीय जागरूकता कैंप लगाया

संगरूर, 10 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): धान की पराली न जलाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा गांव बालियां, ब्लॉक धूरी में ग्राम पंचायत के सहयोग से ब्लॉक स्तरीय किसान जागरूकता कैंप लगाया गया। इसमें 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

इस अवसर पर डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पी.ए.यू.-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने किसानों को धान की पराली जलाने से पर्यावरण, मिट्टी की सेहत और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर तत्व का नुकसान होता है। इसके साथ ही पराली जलाने से निकलने वाली हानिकारक गैसें वातावरण को प्रदूषित करती हैं और मनुष्यों में कई बीमारियों का कारण बनती हैं।

उन्होंने किसानों से पराली जलाने के बजाय इसे खेत में ही प्रबंधित करने की तकनीकें अपनाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने खेत में पराली के प्रबंधन से होने वाले लाभों तथा मिट्टी की सेहत में होने वाले सुधार के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान की पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है, रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम होता है और फसल की पैदावार बढ़ती है।

इसके अलावा उन्होंने गेहूं की अधिक पैदावार देने वाली नई किस्म पी.बी.डब्ल्यू. 887 के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह किस्म पकने में 155 दिन लेती है और इसका औसत उत्पादन 24.60 क्विंटल प्रति एकड़ है। उन्होंने अधिक पैदावार देने वाली किस्मों पी.बी.डब्ल्यू. 872 और पी.बी.डब्ल्यू. 826 के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने गेहूं की विशेष गुणवत्ता वाली किस्मों जैसे पी.बी.डब्ल्यू. जिंक 2, पी.बी.डब्ल्यू. 1 चपाती, पी.बी.डब्ल्यू. आर.एस. 1 और पी.बी.डब्ल्यू. 1 बिस्कुट आदि के बारे में भी किसानों को जानकारी दी। उन्होंने किसानों को रबी मौसम की दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई के लिए भी प्रेरित किया। साथ ही किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सितंबर महीने में आयोजित किए जा रहे किसान मेलों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का निमंत्रण दिया।

डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) ने धान की पराली को खेत में प्रबंधित करते हुए गेहूं की बुवाई करने के लिए पी.ए.यू. द्वारा विकसित कृषि मशीनरी जैसे स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, हैप्पी सीडर, पलटाऊ हल, मल्चर आदि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बेलर की मदद से पराली की गांठें बनाने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया।

उन्होंने पराली में मौजूद पोषक तत्वों को ध्यान में रखते हुए इसे खेत में ही संरक्षित करने पर जोर दिया।

डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने किसानों को पराली को खेत में मिलाकर बोई गई गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्वों की पूर्ति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने गेहूं में गुल्ली-डंडा की प्रभावी रोकथाम के लिए गेहूं के उगने से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले खरपतवारनाशकों के प्रयोग के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने गेहूं में तने की गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए भी महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

कैंप के अंत में किसानों के सवालों के जवाब दिए गए। उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई सर्दी के मौसम की सब्जियों के बीजों की किटें और कृषि साहित्य भी उपलब्ध करवाया गया।

गांव के सरपंच कुलदीप सिंह और सहकारी सभा के अध्यक्ष जगसीर सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की टीम का दिल से धन्यवाद किया। परगट सिंह और उनके साथी किसानों ने कैंप को सफल बनाने के लिए सराहनीय प्रयास किए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments