ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत की बड़ी प्राथमिकता—रूसी रक्षा उपकरणों का अधिक से अधिक स्थानीय उत्पादन; 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026, (गुरमीत सिंह तुंग): भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई अहम मुलाकात में रूस-यूक्रेन युद्ध, काला सागर में समुद्री सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा, रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे केंद्र में रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्रमुख रास्ता बताते हुए शांति के लिए भारत की लगातार जारी अपील को दोहराया। भारत का मानना है कि लंबे समय से जारी इस युद्ध का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा भी प्रभावित हुई है।
काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा बड़ी चिंता: बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने काला सागर क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी राष्ट्रपति पुतिन के सामने उठाया। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण काला सागर का समुद्री क्षेत्र जोखिमपूर्ण बना हुआ है और इसका असर वाणिज्यिक जहाजों तथा समुद्री व्यापारिक मार्गों पर भी पड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद काला सागर क्षेत्र में पांच भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा तथा समुद्री व्यापारिक मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर: मोदी-पुतिन वार्ता का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग को नई दिशा देना रहा। भारत अब केवल रूस से रक्षा उपकरण खरीदने के बजाय उनके स्थानीय उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त निर्माण को बढ़ावा देना चाहता है।
रिपोर्टों के मुताबिक रूस ने भारत के सामने कई रक्षा प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संयुक्त उत्पादन की संभावना भी शामिल है। इसके अलावा भारत के मौजूदा Su-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े को अपग्रेड कर ‘सुपर सुखोई’ बनाने की योजना भी चर्चा में है।
भारत का व्यापक उद्देश्य रूसी मूल की रक्षा प्रणालियों के लिए स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव, अपग्रेड और नए उपकरणों का उत्पादन भारत में बढ़ाना है। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बढ़ावा मिल सकता है और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम हो सकती है।
2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य: मोदी और पुतिन ने भारत-रूस आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
वार्ता में विनिर्माण, ऊर्जा, रेलवे, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और निवेश जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
रूस भारत के लिए ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। वहीं भारत रूस के साथ अपने ऐतिहासिक रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी अपने संबंधों को संतुलित कर रहा है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स में युद्ध, शांति और वैश्विक व्यापार पर चर्चा: 18वां ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस बार सम्मेलन की पृष्ठभूमि में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संकट, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती विश्व व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार ब्रिक्स देशों के बीच एक संयुक्त घोषणा पर भी सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। इसमें अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और एकतरफा सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दों पर व्यापक रुख सामने आ सकता है, हालांकि किसी विशेष देश का सीधे नाम लेने से बचा जा सकता है।
भारत का स्पष्ट रणनीतिक संदेश: कुल मिलाकर, मोदी-पुतिन बैठक में भारत ने एक ओर यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा भी स्पष्ट की।
यह मुलाकात ब्रिक्स मंच पर भारत की व्यापक नीति को रेखांकित करती है—संवाद और शांति की वकालत के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखना, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और भारत के आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देना।






