Wednesday, September 30, 2026
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हौसले को सलाम! 72 साल की उम्र में भी दौड़ का जज़्बा कायम, मोहन सिंह चहल ने जीते दो पदक

 

‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ में 70+ आयु वर्ग में शानदार प्रदर्शन; 400 मीटर में रजत और 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक

रूपनगर, 12 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): उम्र को महज एक आंकड़ा साबित करते हुए रूपनगर के दशमेश नगर निवासी 72 वर्षीय मोहन सिंह चहल ने ‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ में एथलेटिक्स मुकाबलों के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक अपने नाम किए हैं। नेहरू स्टेडियम, रूपनगर में आयोजित इन मुकाबलों में चहल ने 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में हिस्सा लिया।

मोहन सिंह चहल ने पहले 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेते हुए 2 मिनट 4 सेकंड का समय दर्ज किया और दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 800 मीटर दौड़ में भी अपनी रफ्तार और दमखम का शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

800 मीटर में स्वर्ण पर लगाई मुहर: 400 मीटर में रजत पदक जीतने के बाद चहल ने 800 मीटर दौड़ पांच मिनट में पूरी कर पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस तरह 72 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक ही एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण और रजत, दोनों पदक जीतकर खेल के प्रति अपनी लगन और शारीरिक फिटनेस की मिसाल पेश की।

उम्र नहीं, जज़्बा बना ताकत: मोहन सिंह चहल की यह उपलब्धि सिर्फ दो पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधियों और खेलों से दूर हो जाते हैं। 70+ आयु वर्ग में मुकाबला करते हुए उन्होंने साबित किया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, अभ्यास और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ बढ़ती उम्र में भी खेलों से जुड़े रहना संभव है।

युवाओं के लिए भी बड़ा संदेश: चहल का प्रदर्शन उम्र की परवाह किए बिना लोगों को खेलों की ओर प्रेरित करने वाला है। खासकर आज के समय में, जब जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के कारण शारीरिक सक्रियता का महत्व और बढ़ गया है, ऐसी उपलब्धियां समाज को स्वस्थ जीवन, नियमित व्यायाम और खेलों से जुड़ने का संदेश देती हैं।

मोहन सिंह चहल ने 72 वर्ष की उम्र में ट्रैक पर उतरकर न केवल मुकाबला किया, बल्कि एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। उनकी यह उपलब्धि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के उद्देश्य—हर आयु वर्ग को खेलों से जोड़ने—को भी मजबूत करती है।

72 वर्ष की उम्र में दौड़ते मोहन सिंह चहल की यह उपलब्धि स्पष्ट संदेश देती है—ट्रैक पर उम्र नहीं, हौसला और जज़्बा दौड़ता है।

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