लुधियाना, 17 सितम्बर, 2026 (जगजीत सिंह): गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना का पशुपालन मेला सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए एक शानदार प्रदर्शनी होगी। मेले को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वेटरनरी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने कहा कि इस बार का मेला जैविक सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) के प्रति जागरूकता को समर्पित होगा। इसी उद्देश्य से मेले का नारा रखा गया है— “मजबूत जैविक सुरक्षा, करे बीमारियों से रक्षा।”पशुपालकों को जैविक सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं संबंधी जानकारी प्रदान की जाएगी तथा पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों के बारे में अवगत कराया जाएगा। डॉ गिल ने कहा कि मेले में सिर्फ किसानों को ही नहीं बल्कि हर नागरिक को कुछ न कुछ दिलचस्प जरूर मिलेगा। 18 और 19 सितंबर तक चलने वाले पशुपालन मेले के बारे में उन्होंने कहा कि मेले में सभी आयु वर्ग और स्वभाव के लिए विभिन्न वस्तुएं और प्रदर्शनियां प्रदर्शित की जाएंगी डॉ. गिल ने बताया कि कॉलेज ऑफ डेयरी एवं फूड साइंस टेक्नोलॉजी अपनी नवीन प्रौद्योगिकियों, उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों तथा उद्यमिता पहलों की एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित करेगा। इनमें भैंस के दूध से तैयार प्रीमियम क्रीम चीज़ “मख़मली”, विशेष चीज़, मोज़रेला चीज़, बकरी के दूध से बना फेटा चीज़ तथा अन्य गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद शामिल हैं। यह पहल विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और सहयोग संबंधी प्रयासों को भी उजागर करेगी।
प्रदर्शित की जाने वाली एक अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी दूध में मिलावट का पता लगाने हेतु विकसित एक पेपर–स्ट्रिप किट है। यह किट 30 सेकंड से लेकर पाँच मिनट के भीतर यूरिया, न्यूट्रलाइज़र, नमक, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड तथा फॉर्मेलिन जैसी सामान्य मिलावटों की पहचान कर सकती है। विश्वविद्यालय अपने “GADVASU Pure” ब्रांड के अंतर्गत विकसित उत्पादों का भी प्रदर्शन करेगा, जिनमें बकरी के दूध से निर्मित एक विशिष्ट शैंपू भी शामिल है। शेवरे चीज़ तथा ऐसे अन्य उत्पादों का विकास पशुपालकों को विविधीकरण और अधिक लाभ अर्जित करने के नए अवसर प्रदान करता है।
यह कार्यक्रम उन उद्यमियों की सफलता की कहानियों को भी सामने लाएगा जिन्होंने विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा इन्क्यूबेशन सहायता प्राप्त की है। “72 डिग्री”, “ग्रीन पॉकेट्स”, “ग्रैंडपासन डेयरी प्रोडक्ट्स”, “मनप्रीत डेयरी फार्म” तथा “तेजस डेयरी प्रोडक्ट्स” जैसे उद्यम विभिन्न प्रकार के नवोन्मेषी डेयरी उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।
डॉ रविंदर सिंह ग्रेवाल, निदेशक प्रसार शिक्षा ने कहा कि जिन मालिकों के घरों में कुत्ते, बिल्ली आदि पालतू जानवर हैं, उन्हें भी इस मेले का आनंद मिलेगा, क्योंकि इन जानवरों के बेहतर पालन-पोषण, भोजन और टीकाकरण के विशेषज्ञ इस अवसर पर उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपने पशुओं का खून, गोबर, मूत्र और दूध जांच के लिए ला सकते हैं। मेले में कोई जांच शुल्क नहीं लिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने सजावटी मछलियों को रखने और पालने के लिए विशेष काम किया है। मछली पालन के शौकीन लोग इसमें हिस्सा ले सकेंगे। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए फिशरीज कालेज के विशेषज्ञों द्वारा मत्स्य पालन के पेशे से जुड़े लोगों को सभी प्रकार का ज्ञान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाने और इसे बढ़ावा देने वाले तीन किसानों को ‘मुख्यमंत्री पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जाएगा।
डॉ ग्रेवाल ने बताया कि गृहिणियां जो पशुधन व्यवसाय में मदद करती हैं या पूरी तरह से कार्यरत हैं, वे मेले में पशुधन उत्पादों के नए और बेहतर उपयोग पर चर्चा कर सकती हैं। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का स्वाद लेने का एक लाभकारी अवसर है। मीठा दूध, लस्सी, मीठा दही, मीट पैटीज़, मीट कोफ्ता, मीट अचार और पनीर विशेष आकर्षण होगा। मीट कटलेट और विभिन्न अन्य उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
डॉ ग्रेवाल ने आगे कहा कि मेले में मिलावटी दूध की पहचान और जांच के लिए भी जानकारी दी जाएगी ताकि इस्तेमाल किया गया दूध सभी के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो। इससे आम आदमी स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने के बारे में जागरूक हो सकेगा।
डॉ ग्रेवाल ने कहा कि मेले में बेरोजगार युवाओं और छोटे किसानों के लिए कई आकर्षक विषय होंगे। जो किसान कम पैसे में अपना व्यवसाय करना चाहते हैं, उनके लिए मेले में विशेषज्ञ वैज्ञानिक और बैंक अधिकारी हर तरह की जानकारी और वित्तीय सहायता देंगे। उन्होंने कहा कि मेले में स्वच्छ, अच्छा एवं शीघ्र खाद्य पदार्थ तैयार करने की मशीनरी भी रखी जायेगी ताकि आम नागरिकों को यह पता चल सके कि हमें मिलने वाले उत्पाद किस स्वच्छ वातावरण में तैयार होते हैं अथवा उद्यमी अपने उद्योग को बेहतर बना सकते हैं। पशुओं से संबंधित सभी प्रकार की समस्याओं, पशुओं की बीमारियों से संबंधित साहित्य और नया व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने संबंधी जानकारी भी मेले में प्राप्त होगी। पशुपालक मासिक पत्रिका ‘वैज्ञानिक पशुपालन’ घर पर प्राप्त करने के लिए अपना नाम भी पंजीकृत करा सकेंगे।





