वॉशिंगटन डीसी, 20 सितंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): ईरान के साथ जारी अमेरिकी सैन्य संघर्ष का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। CNN द्वारा दो मामलों से परिचित सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किए गए पेंटागन के अनुमान के अनुसार, अमेरिका का अब तक का खर्च लगभग 45.1 अरब डॉलर हो गया है। इसमें 3 सितंबर तक का लगभग 43.6 अरब डॉलर का युद्ध खर्च और अतिरिक्त 1.5 अरब डॉलर का ईंधन खर्च शामिल है।
हालांकि, यह आंकड़ा युद्ध की पूरी वित्तीय तस्वीर नहीं देता। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें क्षतिग्रस्त अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इमारतों की मरम्मत का खर्च तथा सैन्य अभियानों से जुड़े कुछ अप्रत्यक्ष खर्च शामिल नहीं हैं।
सी.बी.ओ. के अनुमान से भी अधिक खर्च
अमेरिकी कांग्रेस की कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) ने 15 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 1 अगस्त 2026 तक ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई पर रक्षा विभाग का खर्च लगभग 38 अरब डॉलर था। इसमें हथियारों और नष्ट हुए सैन्य उपकरणों की भरपाई, बढ़ी हुई उड़ान गतिविधियां, अन्य सैन्य अभियान और ईंधन की बढ़ी लागत शामिल थी।
सी.बी.ओ. ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका अनुमान काफी अनिश्चितता से जुड़ा हुआ है, क्योंकि रक्षा विभाग द्वारा मांगी गई कुछ जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण एजेंसी ने सरकारी डेटाबेस और सार्वजनिक रिपोर्टों का इस्तेमाल किया।
युद्ध जारी रहने से खर्च और बढ़ने का अनुमान
सी.बी.ओ. के मुताबिक, यदि लड़ाई की तीव्रता कम रहती है तो एक और महीने का अतिरिक्त खर्च लगभग 2 अरब डॉलर हो सकता है। यदि हिंसा जुलाई के स्तर तक बढ़ती है तो यह खर्च लगभग 3 अरब डॉलर प्रति माह हो सकता है। इससे अधिक तीव्र संघर्ष की स्थिति में खर्च इससे भी ऊपर जा सकता है।
ऊर्जा और महंगाई पर भी असर
सी.बी.ओ. ने ईरान संघर्ष के व्यापक आर्थिक प्रभावों के बारे में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए तेल और प्राकृतिक गैस की आवाजाही में रुकावट तथा लाल सागर में शिपिंग पर पड़ रहे प्रभावों ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों पर दबाव डाला है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण 2027 की पहली तिमाही में PCE महंगाई फरवरी 2026 के अनुमान की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक हो सकती है। इसी तरह, कोर PCE महंगाई 0.3 प्रतिशत अंक अधिक रहने का अनुमान है।
इस तरह, पेंटागन का 45.1 अरब डॉलर का नया अनुमान युद्ध के बढ़ते प्रत्यक्ष सैन्य खर्च को दर्शाता है, जबकि सैन्य ठिकानों की मरम्मत, कुछ अप्रत्यक्ष खर्च और भविष्य के आर्थिक प्रभाव इससे अलग हैं।






