Monday, September 28, 2026
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विदेश जाने का सपना छोड़ मोगा में शुरू किया अपना कारोबार

गुरसिख परमजीत कौर ने ‘हाथों की मेहनत’ को बनाया अपनी सफलता का हथियार, पति और परिवार भी दे रहे पूरा साथ

मोगा, 23 सितंबर, 2026 (लछमण जीत सिंह पुर्बा): आज के समय में जहां युवाओं और परिवारों में विदेश जाने की होड़ लगी हुई है, वहीं मोगा की रहने वाली परमजीत कौर ने विदेश जाने का सपना छोड़कर अपनी ही धरती पर मेहनत से कामयाबी हासिल करने का रास्ता चुना है। गुरसिख और अमृतधारी परमजीत कौर ने करीब दो साल पहले मोगा में खान-पान का एक छोटा-सा कारोबार शुरू किया था, जो आज लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना रहा है।

परमजीत कौर बताती हैं कि उनका सपना विदेश जाने का था और इसके लिए उन्होंने निजी नौकरी के साथ-साथ अन्य तैयारियां भी की थीं। लेकिन बाद में उन्होंने अपना विचार बदलते हुए खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। उनका कहना है कि अगर अपनी धरती पर मेहनत करके कारोबार खड़ा किया जा सकता है तो किसी दूसरे देश में जाकर नौकरी करने के बजाय अपने ही काम को आगे बढ़ाना बेहतर है।

वह अपने स्टॉल पर आलू और गोभी के परांठे, मिक्स परांठा, सादी रोटी, छोले-भटूरे, चाय, कढ़ी-चावल और राजमा-चावल सहित कई तरह के व्यंजन तैयार करती हैं। खास बात यह है कि आम लोगों की पहुंच को ध्यान में रखते हुए यहां सादी रोटी की कीमत भी केवल 20 रुपये रखी गई है। परमजीत का कहना है कि कारोबार में ईमानदारी और उचित कीमत को प्राथमिकता देने के कारण ग्राहकों का प्यार लगातार मिल रहा है।

परमजीत कौर के पति भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। वह पहले निजी नौकरी करते थे, लेकिन अब दोनों मिलकर अपना कारोबार चला रहे हैं। घर में उनकी माता जी बच्चे की देखभाल और अन्य कामों में सहयोग करती हैं। परिवार के इस सहयोग ने दोनों का हौसला और बढ़ाया है।

परमजीत बताती हैं कि स्टॉल पर अगर कोई जरूरतमंद व्यक्ति आ जाए और उसके पास खाने के पैसे न हों तो उसे बिना पैसे लिए खाना खिला दिया जाता है। वह इसे अपनी नहीं, बल्कि गुरु साहिब की कृपा मानती हैं। हर दिन काम शुरू करने से पहले वह गुरु साहिब के समक्ष अरदास करके अपना काम शुरू करती हैं।

परमजीत कौर का संदेश है कि महिलाओं और युवाओं को झिझक छोड़कर हाथों से मेहनत करनी चाहिए। उनका सपना है कि आने वाले समय में इस छोटे कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाकर अपना होटल खोला जाए। उनका कहना है कि मेहनत, ईमानदारी और परिवार के सहयोग से पंजाब में रहकर भी कामयाबी हासिल की जा सकती है।

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