नई दिल्ली, 25 सितंबर, 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): भारत के आवासीय रियल एस्टेट बाजार में विकास का अगला दौर केवल अधिक घर बेचने के बजाय बेहतर गुणवत्ता, बड़े घरों, सुविधाओं, भरोसेमंद डेवलपर्स और उच्च मूल्य वाली संपत्तियों पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। जेएलएल की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश के प्रमुख बाजारों में घरों की बिक्री 11 प्रतिशत घटकर 2,70,323 इकाई रह गई, लेकिन 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की बिक्री में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2026 की पहली तिमाही में भी यह रुझान जारी रहा। इस दौरान घरों की कुल बिक्री 8 प्रतिशत बढ़कर 70,631 इकाई हो गई, जबकि 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की मांग में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस श्रेणी की हिस्सेदारी प्रमुख सात शहरों की कुल बिक्री में 2025 की पहली तिमाही के 59 प्रतिशत से बढ़कर 71 प्रतिशत हो गई।
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में आवासीय संपत्तियों की बिक्री-मूल्य वृद्धि 4-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, प्रीमियम और लग्जरी घर कुल नई आपूर्ति का 38-40 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, खरीदार अब अधिक खुली जगह, बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं, तकनीक और डेवलपर की विश्वसनीयता को पहले से अधिक महत्व दे रहे हैं। सीबीआरई ने भी 2026 के लिए ‘गुणवत्ता की ओर रुझान’ को प्रमुख ट्रेंड बताया है।
इसके साथ ही रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए पारदर्शिता, समय पर परियोजनाओं को पूरा करना, नियमों का पालन और किफायती घरों की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।
सार: भारतीय रियल एस्टेट का अगला दौर अधिक इकाइयां बनाने के बजाय बेहतर उत्पाद, मजबूत ब्रांड, उच्च गुणवत्ता और ग्राहकों की बदलती जीवनशैली की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।






