नई दिल्ली, 25 सितंबर, 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): गूगल के सी.ई.ओ. सुंदर पिचाई ने 4 नवंबर 2025 को ‘प्रोजेक्ट सनकैचर’ की घोषणा की। इस शोध परियोजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा से संचालित उपग्रहों में गूगल की टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) लगाकर अंतरिक्ष में मशीन लर्निंग और ए.आई. कंप्यूटिंग की संभावनाओं का परीक्षण करना है।
गूगल, प्लैनेट के साथ साझेदारी में 2027 की शुरुआत तक दो प्रोटोटाइप उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है। इस मिशन के दौरान टीपीयू हार्डवेयर, उपग्रह संचार और अंतरिक्ष में वितरित एआई कार्यों के प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा।
गूगल के शोध के अनुसार, भविष्य में एक-दूसरे के करीब उड़ने वाले सौर ऊर्जा संचालित उपग्रहों का समूह बनाया जा सकता है। शोध पत्र में करीब 1 किलोमीटर के दायरे में 81 उपग्रहों के समूह की संभावना का उल्लेख किया गया है। ये उपग्रह तेज गति वाले ऑप्टिकल संचार लिंक के जरिए आपस में जुड़े हो सकते हैं।
इस परियोजना के पीछे एक प्रमुख विचार यह है कि कुछ अंतरिक्ष कक्षाओं में सौर पैनल पृथ्वी की तुलना में काफी अधिक और लगभग लगातार सौर ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। गूगल के अनुसार, कुछ कक्षाओं में यह ऊर्जा उत्पादन पृथ्वी के मध्य अक्षांशों की तुलना में 8 गुना तक अधिक हो सकता है।
हालांकि, यह परियोजना अभी शोध और प्रयोग के चरण में है। गर्मी के निपटान, उपग्रहों के बीच बेहद तेज डेटा ट्रांसफर, अंतरिक्ष विकिरण से सुरक्षा, उपग्रहों की विश्वसनीयता और लॉन्च लागत जैसी कई बड़ी तकनीकी चुनौतियां अभी मौजूद हैं।
गूगल ने ट्रिलियम टीपीयू की विकिरण-रोधक क्षमता का परीक्षण भी किया है। कंपनी के अनुसार, टीपीयू ने पांच साल की अनुमानित अंतरिक्ष अवधि से संबंधित विकिरण खुराक को बिना स्थायी नुकसान के सहन किया।
‘सनकैचर’ का तत्काल लक्ष्य अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करना नहीं है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या सौर ऊर्जा और अंतरिक्ष-आधारित टीपीयू प्रणालियों का इस्तेमाल भविष्य में बढ़ती एआई कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।






