पटियाला, 7 अक्टूबर 2026 (अनिल कुमार भारती): प्रसिद्ध समाज सेवक, अंतरराष्ट्रीय लेखक एवं शिक्षाविद अनिल कुमार “भारती” द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को एक खुला मांग पत्र भेजकर पंजाब में बुजुर्ग पुरुषों की वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा महिलाओं की तर्ज पर 65 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने की पुरजोर मांग की गई है।
प्रेस को जानकारी देते हुए अनिल कुमार “भारती” ने बताया कि राज्य में असंगठित क्षेत्र, दिहाड़ी मजदूरी और छोटे-मोटे काम करने वाले बुजुर्ग 58 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते अपनी शारीरिक क्षमता खो बैठते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा महिलाओं को 58 वर्ष की आयु में पेंशन देकर सहारा देना हालांकि एक सराहनीय कदम है, लेकिन दूसरी ओर उसी आयु के बुजुर्ग पुरुषों को पेंशन के लिए 65 वर्ष की आयु तक यानी और 7 लंबे साल इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है, जो कि पुरुष बुजुर्गों के लिए एक बहुत बड़ी नाइंसाफी की तरह ही है।
उन्होंने कहा, “बुढ़ापा, बीमारी और भूख कभी लिंग देखकर नहीं आती। 58 वर्ष की आयु के बाद एक बुजुर्ग बाप, जो जिंदगी भर परिवार के पालन-पोषण के लिए खून-पसीना बहाता है, वह अगले 7 साल बिना किसी आर्थिक सहारे के कैसे जीये? बहुत से बुजुर्ग यह 7 साल का अरसा झेलते-झेलते गरीबी और मानसिक पीड़ा में ही दुनिया से रुखसत हो जाते हैं। यह भेदभाव न केवल नीतिगत तौर पर अनुचित है, बल्कि मानवता के नाते भी दर्दनाक रवैया है।”
मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गईं प्रमुख मांगें:
आयु सीमा में समानता: पुरुषों के लिए वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 65 वर्ष से घटाकर तुरंत 58 वर्ष की जाए।
नीतिगत समीक्षा:
सामाजिक सुरक्षा विभाग के नियमों की समीक्षा करके लिंग-आधारित असमानता खत्म की जाए।
बजट का विशेष प्रावधान: बुजुर्गों के हक और इंसाफ को प्राथमिकता देते हुए इस फैसले के लिए राज्य के बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान किया जाए।
अनिल कुमार “भारती” ने उम्मीद जताई कि ‘आम आदमी’ और गरीबों की भलाई के लिए पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान इस मांग को महज एक दफ्तरी फाइल न समझकर लाखों बुजुर्गों की दर्दभरी आवाज को सुनेंगे और जल्द से जल्द एक ऐतिहासिक व सहानुभूतिपूर्ण फैसला लेते हुए पुरुष बुजुर्गों के लिए भी पेंशन की आयु सीमा 65 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने संबंधी फैसला जल्द से जल्द लेंगे।





