Sunday, October 11, 2026
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मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक संसाधनों तथा प्राकृतिक खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन तकनीकों का करें किसान उपयोग:गिरीश नागपाल

कुरुक्षेत्र, 8 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि कृषि विभाग के अंतर्गत प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान कुरुक्षेत्र में भिवानी, हिसार, कैथल एवं कुरुक्षेत्र जिलों से आए 30 किसानों का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक संसाधनों के उपयोग तथा प्राकृतिक खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन के संबंध में व्यवहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान पद्मश्री डॉ. हरि ओम ने किसानों को प्राकृतिक खेती में सूक्ष्मजीवों की भूमिका तथा जीवामृत एवं घन जीवामृत के महत्व और उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
डीडीए डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि इस प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों को अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने एवं खेती की लागत को कम करने के लिए प्रेरित किया गया। बलजीत सहारण ने मृदा में जैविक कार्बन बढ़ाने में सूक्ष्मजीवों की भूमिका विषय पर किसानों को जानकारी देते हुए कहा कि लाभकारी सूक्ष्मजीव मृदा की उर्वरता एवं संरचना सुधारने के साथ-साथ पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. महा सिंह द्वारा प्राकृतिक खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती में कीटों की पहचान, निगरानी तथा प्राकृतिक एवं जैविक उपायों के माध्यम से उनके प्रभावी प्रबंधन के बारे में अवगत कराया।
प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान कुरुक्षेत्र के प्रशिक्षण समन्वयक राहुल दहिया, रोशन लाल व प्रदीप शर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के तकनीकी पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया तथा प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों को खेत स्तर पर अपनाने, स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा मृदा की गुणवत्ता एवं कृषि पारिस्थितिकी को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण के समापन पर किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने में रुचि व्यक्त की।

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