जालंधर/हरियाणा, 19 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की कल्पना के अनुरूप पंजाब की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और हर नागरिक के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना ही रामराज्य की ओर पहला कदम होगा। इस पावन अवसर पर आइए, हम सभी भगवान वाल्मीकि के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें। उनके द्वारा दिखाए गए समानता, समरसता और करुणा के मार्ग को अपने जीवन में अपनाएं तथा भयमुक्त, नशामुक्त और खुशहाल समाज के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी रविवार को जालंधर में भगवान वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर आयोजित विशाल तीर्थ यात्रा को संबोधित कर रहे थे। यह विशाल तीर्थ यात्रा जालंधर से अमृतसर स्थित भगवान वाल्मीकि की पावन तपोभूमि श्री रामतीर्थ के लिए रवाना हो रही थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिकवि भगवान वाल्मीकि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक तथा मर्यादा और सामाजिक न्याय के महान ज्ञाता थे। उन्होंने रामायण की रचना करके समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन चरित्र प्रदान किया। इसके माध्यम से उन्होंने जीवन जीने की कला, चरित्र निर्माण और उच्च मानवीय मूल्यों की अमर शिक्षा दी।
वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम की दिव्य कथा का उपहार दिया
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भगवान वाल्मीकि राम नाम की गंगा प्रवाहित करने वाले ऋषियों के ऋषि और योगियों के योगी थे। उन्होंने मानव समाज को भगवान श्रीराम की दिव्य कथा का उपहार दिया। राम नाम का जाप करके ही वे महर्षि बने थे। हमारा परम सौभाग्य है कि हम अयोध्या में उनके हृदय सम्राट भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के साक्षी बने हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने हमें सिखाया कि कोई भी व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और विचारों से महान बनता है। उनकी शिक्षाएं आदर्श समाज की स्थापना करना सिखाती हैं, जहां कोई छोटा या बड़ा न हो और प्रत्येक व्यक्ति को समानता तथा सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले।

उन्होंने कहा कि सत्ता और शासन का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना है। उन्होंने अपने महाकाव्य रामायण में ऐसे समाज की कल्पना की, जहां दुख, भय, भेदभाव, लाचारी और अन्याय का कोई स्थान नहीं था।
उन्होंने कहा कि जब हम भगवान वाल्मीकि का प्रकटोत्सव मना रहे हैं, तो हमें उनकी शिक्षाओं के प्रकाश में समाज की परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा। पंजाब की यह पवित्र धरती गुरुओं, पीरों, संतों और वीरों की तपोभूमि रही है। इस धरती ने हमेशा देश को दिशा दिखाई है, देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है और सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया है।
नागरिक, किसान, मजदूर और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बड़े दुख और चिंता के साथ कहना पड़ता है कि वर्तमान समय में पंजाब जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वे बेहद चिंताजनक हैं। पंजाब का युवा निराशा और नशे के जाल में फंसता जा रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण आम नागरिक, किसान, मजदूर और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार की नीतियों और नीयत में दिखाई दे रही दिशाहीनता तथा दूरदर्शिता की कमी ने राज्य के विकास की गति को रोक दिया है।
महर्षि वाल्मीकि का रामराज्य का संदेश आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा शासक और सरकार वही है, जो जनता के कल्याण के लिए दिन-रात काम करे, युवाओं को सही दिशा दिखाए और समाज में सुरक्षा तथा न्याय का वातावरण बनाए।
उन्होंने कहा कि जब सरकारें अपने वादों से मुकर जाती हैं और युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनके हाल पर छोड़ देती हैं, तब समाज में समरसता की जगह विभाजन की राजनीति शुरू हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में महर्षि वाल्मीकि का रामराज्य का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में आज प्रशासनिक विफलताएं सामने आ रही हैं। चाहे कानून का शासन स्थापित करने में विफलता हो, आर्थिक बदहाली हो या युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि सत्ता में बैठे लोग भगवान वाल्मीकि और हमारे महान गुरुओं की शिक्षाओं से भटक गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने हमें सिखाया कि समाज में शांति और प्रगति तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग एकजुट हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बने। पंजाब को आज फिर से उसी नैतिक और सामाजिक नवजागरण की आवश्यकता है। पंजाब के युवाओं को नशे से बचाकर उन्हें अच्छी शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा होगी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में गरीब परिवारों को आयुष्मान योजना से जोड़कर 40 लाख लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। सरकार बुजुर्गों के इलाज की चिंता कर रही है। इसके अलावा, दो लाख परिवारों को मकान बनाकर देने के साथ ही महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता से किए गए 217 संकल्पों में से 76 पूरे कर दिए हैं।
वाल्मीकि के विचारों पर चलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र को अपनाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा और पंजाब केवल पड़ोसी राज्य नहीं हैं, बल्कि हम एक ही शरीर की दो भुजाएं हैं। हमारा खान-पान, इतिहास और संस्कृति एक हैं। हरियाणा में भाजपा सरकार ने भगवान वाल्मीकि और सभी महान संतों के विचारों पर चलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र को अपनाया है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है, ताकि हमारे महापुरुषों की शिक्षाएं जन-जन तक पहुंच सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हर वर्ग के कल्याण, युवाओं को पारदर्शी तरीके से बिना पर्ची-बिना खर्ची के नौकरियां देने और गरीब से गरीब व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में युवाओं को नौकरियां देने के बजाय नशे की पुड़िया थमाने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी पंजाब भी खुशहाल और समृद्ध बने तथा यहां का प्रत्येक नागरिक प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़े। यह बदलाव तभी संभव होगा, जब हम झूठे दावों और लोकलुभावन वादों से बाहर निकलकर सुशासन, विकास, ईमानदारी और नेक नीयत पर आधारित राजनीति को अपनाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की नीतियां पंजाब, पंजाबी संस्कृति और सिख गुरुओं के उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित रही हैं। इसलिए पंजाब के लोगों को भी विकास केंद्रित सोच अपनानी चाहिए, ताकि केंद्र और राज्य के तालमेल से खुशहाल, नशामुक्त और समृद्ध समाज का निर्माण हो सके।
उन्होंने कहा कि इसके लिए नशे के खिलाफ लड़ाई, सामाजिक समानता और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लेना होगा। पंजाब को फिर से रंगला, हंसता-खेलता और प्रगतिशील पंजाब बनाना है। भगवान वाल्मीकि के आशीर्वाद से पंजाब इन संकटों से बाहर निकलेगा और एक बार फिर देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
कार्यक्रम में मुख्य आयोजक एवं भगवान वाल्मीकि उत्सव कमेटी के अध्यक्ष विपिन सभरवाल, महामंडलेश्वर बंसीदास, केशवदास, बाबा राजकिशोर, जगजीत सिंह महाराज, अमरजीत कादरी, जिला अध्यक्ष अशोक सरीन, बृजिंदर सिंह हमदर्द, स्थानीय धार्मिक संस्थाओं के सम्मानित पदाधिकारी, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।






