भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों पर विचार करेगी समिति; पांच डीन सहित सात वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल, सिफारिशों के लिए समय-सीमा तय नहीं
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह ): जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) में विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की ओर से गठित यह समिति प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से बातचीत करने, उनकी मांगों को सुनने और शिकायतों के समाधान के संभावित रास्ते तलाशने का काम करेगी।
विद्यार्थियों की मांगों को लेकर जारी विरोध के बीच इस फैसले को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य परिसर में तनाव कम करना, विद्यार्थियों की समस्याओं पर विचार करना और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सामान्य माहौल बहाल करने की संभावनाएं तलाशना है।
पांच संकायों के डीन को भी किया गया शामिल
विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, समिति में पांच डीन सहित सात वरिष्ठ शिक्षाविदों को जगह दी गई है। इसमें मानविकी एवं भाषा संकाय के डीन प्रो. इक्तिदार मोहम्मद खान, जीवन विज्ञान संकाय के डीन प्रो. लुकमान अहमद खान, सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. जुबेर मीनाई, छात्र कल्याण के डीन प्रो. नीलोफर अफजल और अकादमिक मामलों की डीन प्रो. तनुजा शामिल हैं।
इसके अलावा विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की प्रो. मिनी एस. थॉमस और अंग्रेजी विभाग की प्रो. सीमी मल्होत्रा को भी समिति का सदस्य बनाया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति
समिति के गठन का फैसला रविवार को विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया। बैठक में कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी, विभिन्न संकायों के डीन, छात्र कल्याण डीन, मुख्य प्रॉक्टर, छात्रावास प्रावोस्ट और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में धरने और भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों की मांगों पर चर्चा की गई। इसके बाद प्रशासन ने उनकी शिकायतों को सुनने और विवाद के समाधान के लिए बातचीत का माध्यम तैयार करने के उद्देश्य से समिति गठित करने का निर्णय लिया।
समिति की भूमिका पर टिकी विद्यार्थियों की नजरें
समिति के गठन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यार्थियों के साथ बातचीत कब शुरू होती है और उनकी मांगों पर किस तरह विचार किया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति की सिफारिशें सौंपने के लिए फिलहाल कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की है।
यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि समिति की ओर से किन मांगों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनके समाधान के लिए क्या समय-सीमा निर्धारित होगी। इसलिए समिति का गठन अभी संवाद की शुरुआत है, न कि आंदोलन समाप्त होने या विद्यार्थियों की मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान निकालने के साथ परिसर में शांति और पढ़ाई का माहौल कायम किया जा सके। आने वाले दिनों में समिति की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पहल की दिशा और प्रभाव को स्पष्ट करेंगे।






