फतेहगढ़ साहिब, 16 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुग): श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, फतेहगढ़ साहिब के इतिहास विभाग की ओर से “औपनिवेशिक पंजाब में पंजाबी प्रिंट मीडिया में महिलाओं के चित्रण के संदर्भ में नैतिकता, मूल्य और आचरण” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस व्याख्यान का उद्देश्य औपनिवेशिक काल के दौरान पंजाबी प्रिंट मीडिया में महिलाओं के चित्रण तथा उनसे संबंधित नैतिक आदर्शों, सामाजिक मूल्यों और आचरण के मानदंडों पर अकादमिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना था।
यह कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) परित पाल सिंह, कुलपति के संरक्षण तथा प्रो. (डॉ.) सुखविंदर सिंह बिलिंग, डीन अकादमिक मामले एवं प्रमुख, इतिहास विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
इस विशेष व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. परनीत कौर ढिल्लों, एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास एवं पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला थीं। अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने औपनिवेशिक काल के पंजाबी प्रिंट मीडिया में प्रकाशित पत्रिकाओं और ट्रैक्टों के माध्यम से महिलाओं की नैतिकता, घरेलू भूमिकाओं और व्यवहार से जुड़ी अपेक्षाओं को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया, इस पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दृष्टिकोण साझा किए।
उन्होंने औपनिवेशिक पंजाब के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि प्रिंट मीडिया ने लैंगिक मानदंडों, महिलाओं की शिक्षा और नैतिक आचरण से संबंधित धारणाओं को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें चुनौती देने और नए सिरे से परिभाषित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अभिलेखागार में संरक्षित मुद्रित सामग्री को महिलाओं के इतिहास के पुनर्निर्माण और आधुनिक पंजाब के सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों को समझने के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत के रूप में रेखांकित किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. (डॉ.) परित पाल सिंह ने ऐसी अकादमिक गतिविधियों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐतिहासिक स्रोतों में महिलाओं के चित्रण का अध्ययन औपनिवेशिक पंजाब के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रो. (डॉ.) सुखविंदर सिंह बिलिंग ने विद्यार्थियों में ऐतिहासिक चेतना, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए ऐसे अकादमिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।
इस विशेष व्याख्यान का संचालन डॉ. जसप्रीत कौर, प्रभारी, इतिहास विभाग ने किया, जबकि डॉ. अमनदीप कौर, सहायक प्रोफेसर, इतिहास विभाग ने समन्वयक की भूमिका निभाई। इस अवसर पर इतिहास विभाग के सभी शिक्षक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित थे।
यह विशेष व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए जानकारीपूर्ण और प्रेरणादायक साबित हुआ। अंत में धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह अकादमिक प्रयास पंजाब के सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन और ऐतिहासिक शोध को प्रोत्साहित करने के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।






