चंडीगढ़, 24 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विधानसभा में बोलते हुए कहा कि ‘वोट चोरी’ भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई।
पंजाब विधानसभा ने ध्वनिमत से SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इसे नागरिकों के मतदान के अधिकार के कथित हनन के खिलाफ पंजाब के विरोध के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रस्ताव के साथ पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने SIR प्रक्रिया की निंदा करते हुए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है।
“पहले जनता सरकार चुनती थी, अब सरकार वोटर चुनती है” मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग के नाम पर मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है। उनके अनुसार, इसमें अपने पक्ष के मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां जनता द्वारा चुनी गई सरकार अब यह तय कर रही है कि कौन मतदान कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मतदान का अधिकार किसी सरकार की कृपा नहीं है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समानता और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार दिया है। किसी भी योग्य नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और पंजाब के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाया- मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय निवेश लाने के प्रयासों में केंद्र सरकार की ओर से पैदा की जा रही कथित बाधाओं का भी जिक्र किया। मान ने कहा कि पंजाब के आर्थिक विकास, युवाओं के रोजगार और खुशहाली को राजनीतिक मतभेदों की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।
कृषि और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर जताई चिंता- मुख्यमंत्री ने देश की कृषि नीतियों और विदेशी व्यापार समझौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे समझौतों से भारतीय कृषि पर बाहरी दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों ने ऐतिहासिक आंदोलनों के माध्यम से शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता दिखाया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर संसद, राज्य सरकारों और किसान संगठनों के साथ पारदर्शी तरीके से चर्चा की जानी चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने देश की सभी लोकतांत्रिक ताकतों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मतदान की पवित्रता, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और देश के संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।