चंडीगढ़, 28 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब विधानसभा के आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के अंतिम सत्र में नदी जल विवाद और राज्य के जल संसाधनों पर अधिकार को लेकर पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। कई घंटे चली बहस के दौरान पंजाब के यमुना जल में ऐतिहासिक एवं कानूनी अधिकार, सिंचाई हेडवर्क्स पर नियंत्रण, बांध सुरक्षा कानून, राजस्थान को दिए जा रहे पानी के बदले रॉयल्टी और रावी नदी के पानी के उपयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। इसके अलावा करतारपुर कॉरिडोर खोलने और जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के संबंध में भी प्रस्ताव पारित किए गए।
प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र के दौरान कांग्रेस के विधायक अनुपस्थित रहे, जबकि भाजपा के दोनों विधायक भी सदन में मौजूद नहीं थे। बहुजन समाज पार्टी के विधायक डॉ. नछत्तर पाल और शिरोमणि अकाली दल के बागी विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने प्रस्तावों का समर्थन किया। सदन के बाहर आम आदमी पार्टी और विपक्षी विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
यमुना के पानी पर पंजाब ने जताया ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार
कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल द्वारा पेश किए गए पहले प्रस्ताव में वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से पहले के अविभाजित पंजाब का हवाला देते हुए यमुना नदी के पानी पर पंजाब के ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार का दावा किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे की तरह यमुना के जल वितरण में पंजाब को शामिल नहीं किया गया।
प्रस्ताव में राज्य के भूजल संकट को भी प्रमुखता से उठाया गया। सरकार के अनुसार, पंजाब का लगभग 72 प्रतिशत क्षेत्र भूजल संकट की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। इस संबंध में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष जल विवाद न्यायाधिकरण गठित करने के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का भी उल्लेख किया।
बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 को वापस लेने की मांग
तीसरे प्रस्ताव में विधानसभा द्वारा 5 मई 2025 को पारित प्रस्ताव की पुष्टि की गई, जिसमें बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 को निरस्त करने की मांग की गई थी। पंजाब सरकार ने इस कानून को देश के संघीय ढांचे से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग दोहराई।
राजस्थान से पानी की रॉयल्टी मांगने का प्रस्ताव
चौथे प्रस्ताव में राजस्थान को सतलुज, रावी और ब्यास नदियों से उपलब्ध कराए जा रहे पानी के बदले रॉयल्टी देने की मांग की गई। प्रस्ताव के अनुसार, राजस्थान इन जल संसाधनों का उपयोग सिंचाई, पेयजल और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करता है। पंजाब सरकार का तर्क है कि इस उपयोग के बदले राज्य को वित्तीय मुआवजा मिलना चाहिए और संबंधित बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।
यह मांग अंतरराज्यीय जल बंटवारे के लंबे समय से चले आ रहे विवाद को आर्थिक अधिकारों के नजरिए से उठाती है। हालांकि, रॉयल्टी की मांग को लेकर कोई अंतिम कानूनी निर्णय इस प्रस्ताव से अपने आप स्थापित नहीं होता।
उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग
पांचवें प्रस्ताव में रावी नदी के पानी के बेहतर उपयोग के लिए केंद्र सरकार से उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की मांग की गई। प्रस्ताव में उज्ज नदी के पानी को रणजीत सागर बांध की ओर मोड़ने की बात कही गई, ताकि इसका अधिकतम उपयोग पंजाब के भीतर किया जा सके और पानी का पाकिस्तान की ओर बहना कम हो।
सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राज्य में जल भंडारण और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को बेहतर बनाया जा सकता है। हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन, तकनीकी व्यवस्था और संबंधित राज्यों के बीच समन्वय के लिए आगे की कार्रवाई आवश्यक होगी।
करतारपुर कॉरिडोर और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रस्ताव
जल विवाद से संबंधित पांच प्रस्तावों के अतिरिक्त कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने से संबंधित प्रस्ताव पेश किया। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के संबंध में प्रस्ताव रखा। दोनों प्रस्ताव भी पारित किए गए।
किसान संगठनों ने जताई असंतुष्टि
विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद किसान संगठनों की प्रतिक्रिया पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। संयुक्त किसान मोर्चा ने देर शाम बैठक कर इन प्रस्तावों पर चर्चा की। ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने कहा कि किसानों की अधिकांश मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उनके अनुसार, पंजाब सरकार ने जल विवाद के समाधान के लिए आवश्यक संवैधानिक पक्ष को प्रभावी ढंग से सामने रखने से परहेज किया है।
गौरतलब है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को मालवा क्षेत्र की 69 विधानसभा सीटों पर बड़ी सफलता मिली थी। उस समय किसान आंदोलन और किसान संगठनों के साथ बने राजनीतिक समीकरणों को भी महत्वपूर्ण माना गया था। इस वर्ष राज्य सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा तथा भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) के नेताओं के बीच हुई बातचीत में कुछ प्रस्तावों को लेकर सहमति बनने की बात भी सामने आई थी।
पंजाब के नदी जल विवाद में इन प्रस्तावों का महत्व राजनीतिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर है। हालांकि, विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना अपने आप में अंतरराज्यीय जल बंटवारे, रॉयल्टी या हेडवर्क्स के नियंत्रण से संबंधित विवादों का अंतिम कानूनी समाधान नहीं है। इन मुद्दों पर आगे की स्थिति केंद्र सरकार, संबंधित राज्यों और सक्षम कानूनी संस्थाओं की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।






