ऊर्जा मंत्री ने उद्घाटन समारोह के अवसर पर गांधी ग्राउंड में होने वाली रैली में अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने की अपील की
अंबाला, 29 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी 5 नवंबर को अंबाला छावनी में बनाए गए शहीदी स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद गांधी ग्राउंड में कार्यकर्ताओं की एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस रैली और शहीदी स्मारक के कार्यक्रम में शामिल होना लोगों के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार हरियाणा के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को यह शहीदी स्मारक अवश्य दिखाया जाएगा, ताकि युवा जान सकें कि वर्ष 1857 में मेरठ से पहले अंबाला में स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ था। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस रैली में बड़ी संख्या में पहुंचें।
श्री विज बुधवार को अंबाला शहर के एक क्लब में शहीदी स्मारक के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वह शहीदी स्मारक के निर्माण के लिए पिछले 25 से 30 वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं। अब तक पुस्तकों में यही पढ़ाया जाता रहा है कि स्वतंत्रता की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी थी, लेकिन कांग्रेस की स्थापना से भी पहले वर्ष 1857 में पूरे हिंदुस्तान में आजादी के लिए सशस्त्र संघर्ष हुआ था, जिसकी शुरुआत अंबाला से हुई थी।
उन्होंने कहा कि दस्तावेजों से पता चलता है कि वर्ष 1857 में मेरठ से दस घंटे पहले, सुबह नौ बजे अंबाला छावनी में 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री ने स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा दिया था। लेकिन इतिहास में उन वीरों को कभी याद नहीं किया गया, जिन्हें पेड़ों से बांधकर गोलियां मारी गईं और जिन पर कोल्हू चलाए गए। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए जिसने भी अपने घर से एक कदम बाहर निकाला, वह भी नमन के योग्य है।
शहीदी स्मारक के निर्माण की मांग कई बार विधानसभा में उठाई, हमारी सरकार आने पर मिली मंजूरी: अनिल विज
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वर्ष 1857 में पूरे देश में आजादी की पहली लड़ाई लड़ी गई थी, लेकिन इसे कभी उचित रूप से याद नहीं किया गया और न ही ऐसा कोई स्मारक बनाया गया, जहां इस संघर्ष को दर्शाया जा सके।
उन्होंने कहा कि स्मारक के निर्माण के लिए उन्होंने विधानसभा में कई बार कांग्रेस सरकार से मांग की, लेकिन स्मारक नहीं बनाया गया। वर्ष 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर का स्मारक बनाने की मंजूरी मिली।
800 करोड़ रुपये की लागत से बना स्मारक, आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित होगा इतिहास: विज
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वर्ष 1857 की पहली स्वतंत्रता लड़ाई को समर्पित इस शहीदी स्मारक में पूरे संघर्ष का इतिहास प्रदर्शित किया जाएगा। हरियाणा, बिहार, पंजाब और अन्य स्थानों पर जहां-जहां यह लड़ाई लड़ी गई, वहां के संघर्ष का इतिहास आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शहीदी स्मारक लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्हें विश्वास है कि इसे देखने के लिए पूरे हिंदुस्तान से लोग आएंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह ताजमहल देखने के लिए विदेशी पर्यटक आते हैं, उसी तरह वे शहीदी स्मारक देखने भी जरूर आएंगे। इसी उद्देश्य से यहां हेलीपैड की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस विशाल शहीदी स्मारक को देखने आने वाले लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की पूरी जानकारी दी जाएगी। यहां लगभग ढाई हजार लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है, जहां शाम के समय विशाल कमल के फूल पर लाइट, लेजर और साउंड शो प्रदर्शित किया जाएगा।
स्मारक में कमल के फूल के आकार का मेमोरियल टावर होगा आकर्षण का केंद्र: विज
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वर्ष 1857 के संघर्ष के दौरान देशभर में एक रेजिमेंट से दूसरी रेजिमेंट तक कमल का फूल और रोटी प्रतीकात्मक रूप से भेजे जाते थे। इन्हें स्वीकार करने का अर्थ यह माना जाता था कि संबंधित रेजिमेंट भी संघर्ष के लिए तैयार है।
उन्होंने बताया कि शहीदी स्मारक में 68 मीटर ऊंचा कमल के फूल के आकार का मेमोरियल टावर बनाया गया है, जिसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं। कमल के फूल के अंदर भी एक संग्रहालय बनाया गया है, जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा।
स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक विशेष गैलरी भी बनाई गई है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा।






