यरुशलम, 30 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चुनावों के अंतिम नतीजे जारी कर दिए हैं। इन नतीजों के साथ 26वीं नेसेट (इजरायल की संसद) में विभिन्न राजनीतिक दलों की सीटों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। नई निर्वाचित संसद 10 नवंबर को शपथ ग्रहण करेगी। हालांकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को केवल 53 सीटें मिली हैं, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से कम हैं।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाली लिकुड पार्टी 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बाद यशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। बी’याचद ने 12 और ज्वाइंट लिस्ट ने 11 सीटें हासिल की हैं। डेमोक्रेट्स और राम पार्टी को 8-8 सीटें मिली हैं, जबकि इजरायल बेतेनू, यूनाइटेड टोरा यहूदीज्म और ओत्जमा यहूदीत ने 7-7 सीटें जीती हैं। इसी तरह शास और रिलीजियस जायनिज्म को 6-6 सीटें मिली हैं।
नेतन्याहू समर्थक गठबंधन बहुमत से दूर
अंतिम नतीजों के अनुसार, नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू विरोधी खेमे के पास 48 सीटें हैं। अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। इस तरह किसी भी राजनीतिक खेमे के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है।
चुनाव में कुल मतदान 77.9 प्रतिशत रहा और 57,16,665 वोट डाले गए। दूसरी ओर, रिजर्विस्ट पार्टी को 2.7 प्रतिशत, पीपल ऑफ इजरायल को 1.7 प्रतिशत और हरेदी पब्लिक को 0.2 प्रतिशत वोट मिले। ये पार्टियां 3.25 प्रतिशत की अनिवार्य चुनावी सीमा पार नहीं कर सकीं।
चुनाव के अंतिम आधिकारिक नतीजे संभावित गलतियों और आपत्तियों की जांच के बाद 4 नवंबर को इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाएंगे। इसके बाद नई संसद 10 नवंबर को शपथ ग्रहण करेगी।
सरकार बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बातचीत
चुनाव नतीजों के बाद नेतन्याहू और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच के बीच अगली रणनीति को लेकर मुलाकात होने की खबरें सामने आई हैं। स्मोट्रिच रिलीजियस जायनिज्म-जयहुत पार्टी के नेता हैं।
इस बीच अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने नेतन्याहू को लिकुड पार्टी की जीत पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लिकुड एक बार फिर इजरायल की प्रमुख राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। उन्होंने इजरायल और अर्जेंटीना के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की बात भी कही।
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की ओर से अंतिम नतीजों की आधिकारिक प्राप्ति के बाद विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने का निमंत्रण दे सकते हैं, जिसके पास बहुमत हासिल करने की सबसे अधिक संभावनाएं होंगी। यदि पहला नेता सरकार बनाने में असफल रहता है तो किसी अन्य नेता को भी मौका दिया जा सकता है। निर्धारित समय के भीतर सरकार नहीं बनने की स्थिति में दोबारा चुनाव कराने का रास्ता भी खुल सकता है।
अरब पार्टियों की भूमिका हो सकती है अहम
सरकार गठन की संभावनाओं के बीच यशर पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट की ओर से अरब पार्टियों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने की संभावना भी चर्चा में है। हालांकि राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने इस संभावना को लगभग असंभव बताया है। उन्होंने यह विचार अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ हुई बैठक के दौरान व्यक्त किया।
दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स पार्टी ने अरब बहुल पार्टियों को सरकार में शामिल करने के मामले में खुलापन दिखाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, लिकुड, गादी आइजेनकोट की यशर, नफ्ताली बेनेट की टुगेदर मूवमेंट और अविगदोर लिबरमैन की इजरायल बेतेनू को एक साथ लाकर 66 सीटों वाला गठबंधन बनाने की संभावना भी सैद्धांतिक रूप से मौजूद है। हालांकि नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के विपक्षी खेमे के चुनावी वादे और उनकी दक्षिणपंथी तथा अति-रूढ़िवादी सहयोगियों पर निर्भरता के कारण ऐसे गठबंधन की संभावना फिलहाल मुश्किल मानी जा रही है।
चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के संदेह की जांच
इजरायल के चुनावों के नतीजे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब चुनाव प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप और वोटों में गड़बड़ी को लेकर विवाद भी चल रहा है।
केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने शिन बेत के प्रमुख डेविड जिनी को अरब क्षेत्रों में मतदान के रुझानों को प्रभावित करने के लिए विदेशी ताकतों की ओर से कथित प्रयासों की जांच करने को कहा है।
हालांकि चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया की समग्र विश्वसनीयता से बड़े स्तर पर समझौता होने के दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
कुल मिलाकर, इजरायल के चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो गया है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।