Wednesday, November 4, 2026
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डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपायुक्तों को सीएम विंडो की लंबित शिकायतों का तुरंत निपटारा करने के दिए निर्देश

चंडीगढ़, 30 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा की वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को सभी उपायुक्तों को सीएम विंडो पोर्टल पर दर्ज लंबित शिकायतों के निपटारे में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि नागरिकों की शिकायतों का समाधान निर्धारित समय सीमा के भीतर तुरंत किया जाए। उन्होंने समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण समय-सीमा पार कर चुकी शिकायतों की निगरानी करने और विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने पर जोर दिया, ताकि शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक देरी न हो।

डॉ. मिश्रा चंडीगढ़ स्थित वित्त आयुक्त राजस्व कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। इस बैठक का उद्देश्य जिला स्तर पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और सीएम विंडो शिकायत निवारण प्रणाली के तहत लंबित शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करना था।

बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि पोर्टल पर कुल 16,17,688 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 27 अक्टूबर तक 15,60,782 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। निपटाई गई शिकायतों में से 4,55,846 शिकायतों का समाधान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया गया है।

डॉ. मिश्रा ने उपायुक्तों को समय-सीमा पार कर चुके मामलों को प्राथमिकता देने, बिना किसी देरी के कार्रवाई शुरू करने और जिला स्तर पर लंबित शिकायतों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी स्तर पर शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तय की जाए।

जिला स्तर पर समग्र प्रदर्शन के मूल्यांकन में यमुनानगर ने 100 में से सर्वाधिक 94 अंक प्राप्त किए। इसके बाद पलवल ने 85, हांसी ने 81 और गुरुग्राम ने 80 अंक हासिल किए। फरीदाबाद को 78, नूंह को 77 और नारनौल को 75 अंक मिले। झज्जर, पानीपत और भिवानी ने 74-74 अंक प्राप्त किए, जबकि रेवाड़ी ने 73 अंक हासिल किए। पंचकूला, हिसार और करनाल ने 72-72 अंक प्राप्त किए। इसके बाद कुरुक्षेत्र 71 अंकों के साथ रहा।

उन्होंने बताया कि यह समग्र मूल्यांकन चार मानदंडों के आधार पर किया जाता है। इनमें शिकायतें दर्ज करना, एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करना, समय-सीमा पार कर चुके मामले और शिकायतों के निपटारे का प्रदर्शन शामिल हैं। इन मानदंडों के लिए क्रमशः अधिकतम 20, 25, 25 और 30 अंक निर्धारित किए गए हैं।

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि शामिल किए गए सभी 23 उपायुक्त कार्यालयों में शुरुआती स्तर पर 30 दिनों से अधिक समय से कोई शिकायत लंबित नहीं पाई गई। हालांकि, जिन मामलों में एक्शन टेकन रिपोर्ट का इंतजार था, उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया।

सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए बैठक में बताया गया कि कुल 1,05,696 शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें से 21 अक्टूबर तक 85,883 का निपटारा किया जा चुका था। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कुल निपटारा प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन इसमें और तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने सभी उपायुक्तों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने और 95 प्रतिशत निपटारा दर हासिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने पिछले महीने के दौरान पलवल के उपायुक्त के प्रदर्शन की सराहना की।

उन्होंने जोर देकर कहा कि शिकायतों का निपटारा ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पुराना मामला लंबित न रहे। जिन मामलों में शिकायतों को सही तरीके से नहीं संभाला गया था, उनकी समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित उपायुक्तों को एक दिन के भीतर जांच कर उनका निपटारा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आगे निर्देश दिए कि रिक्त पदों और बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों से संबंधित लगातार मिल रही शिकायतों की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से की जाए और उन्हें मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाए। निर्देशों के अनुसार, उपायुक्तों को अपने सोशल मीडिया हैंडल सक्रिय रखने और शिकायत निवारण से संबंधित अपडेट सीधे शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया।

बैठक में किसान आईडी बनाने और पीएम-किसान की किस्तों पर इसके प्रभाव, भूमि रिकॉर्ड तक पहुंच, आवंटित आवासीय प्लॉटों की निशानदेही और कब्जा, विवाह सहायता, संपत्ति रिकॉर्ड तथा लंबित कृषि भुगतान से संबंधित व्यक्तिगत शिकायतों की भी समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान शिकायतें दर्ज करने की गुणवत्ता में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त और उपमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालयों में सीएम विंडो काउंटरों पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटरों को संक्षिप्त, असंबंधित या अधूरी जानकारी लिखने के बजाय आवेदक द्वारा बताई गई शिकायत का पूरा विवरण दर्ज करने की सलाह दी गई।

यह देखा गया कि स्पष्ट और विस्तृत विवरण दर्ज करने से अधिकारियों को शिकायतों की प्रकृति समझने में मदद मिलती है और शुरुआती स्तर पर उनकी जांच करना आसान हो जाता है।

डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को अगले 48 घंटों में लंबित मामलों का निपटारा करने और अपडेटेड एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने पोर्टल उपयोगकर्ताओं को जानकारी का सही रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए लॉगइन करने के बाद अपना [मूल पंजाबी समाचार यहां अधूरा समाप्त होता है]।

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