अटलांटा, 31 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तंग): भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों, ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्गों में रुकावटों और ऊर्जा व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जा रहे हमलों के कारण वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
शुक्रवार को अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पादन की कमी से अधिक अनिश्चितता, आपूर्ति में व्यवधान, बढ़ती लागत और ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच की चुनौतियों से जुड़ा हुआ है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित बैठक में जयशंकर ने कहा कि G20 देशों को वैश्विक ऊर्जा बाजार को खुला, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य बनाए रखने के लिए सामूहिक समझ और नेतृत्व दिखाना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में बताया कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाली गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा कीमतों को प्रभावित करने का एक सुनियोजित प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों, आपूर्ति मार्गों में रुकावटों और अन्य बाधाओं के कारण ऊर्जा बाजार में बार-बार अस्थिरता पैदा हो रही है। इन व्यवधानों का प्रभाव अब अधिक व्यापक और जटिल होता जा रहा है।
गरीब देशों पर ऊर्जा संकट का अधिक असर
विदेश मंत्री ने चिंता जताई कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान कम आय वाले देशों की समस्याओं और उनकी जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेल और गैस के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं तथा कुछ देशों को चुनिंदा आधार पर राहत दी जा रही है।
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का असर दूसरे देशों और बाजारों पर भी पड़ता है। इसलिए वैश्विक बाजार में आपसी निर्भरता और इसके व्यापक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
भारत को LPG की भरोसेमंद आपूर्ति की जरूरत
बैठक में जयशंकर ने भारत की ऊर्जा जरूरतों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को स्वच्छ खाना पकाने के लिए LPG की नियमित, विश्वसनीय और अनुमानित आपूर्ति की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के क्षेत्र में भारत की रणनीति का भी जिक्र किया। जयशंकर ने बताया कि भारत का राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन खनिजों की खोज से लेकर उनके पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) तक के सभी पहलुओं को शामिल करता है।
इसके साथ ही भारत ने G20 क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलरिटी इनिशिएटिव का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के बेहतर उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नई तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील
जयशंकर ने G20 देशों से ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (SMR), ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन (बायोफ्यूल) जैसी आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग, स्थिर आपूर्ति व्यवस्था और नई तकनीकों में निवेश आवश्यक है।






