कुरुक्षेत्र, 1 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शक्तिपीठ मां भद्रकाली के दरबार में आकर उन्हें असीम शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई है। यह स्थान हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का महान केंद्र है।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र में देशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुरुक्षेत्र पहुंचने पर हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर पंडित सतपाल शर्मा ने मंदिर परिसर में फूलों के गुलदस्ते भेंट कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने सबसे पहले मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन देवी कूप पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने परंपरा के अनुसार पूजा की और मंदिर की परिक्रमा भी की। इसके बाद राष्ट्रपति गर्भगृह में पहुंचीं, जहां उन्होंने मां भद्रकाली की विधिवत पूजा-अर्चना, आरती और मंत्रोच्चारण के साथ प्रार्थना की। उन्होंने माता को पंचामृत, पंचमेवा, नारियल और चुनरी का प्रसाद अर्पित किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर के पुजारियों ने देश की मंगलकामना के लिए विशेष पूजा संपन्न करवाई। पूजा के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा।
पूजा-अर्चना के उपरांत शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर पंडित सतपाल शर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शक्ति के प्रतीक त्रिशूल, माता की प्रतिमा और चुनरी भेंट की। उन्होंने राष्ट्रपति को माता का आशीर्वाद और प्रसाद भी प्रदान किया तथा शक्तिपीठ की महिमा और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता आशीर्वाद स्वरूप विराजमान हैं और इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महाभारत काल में पांडवों ने युद्ध से पहले यहां विजय की कामना के साथ पूजा-अर्चना की थी।






