वाशिंगटन, 2 नवंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान मानवीय सहायता के लिए किया गया पांच दिवसीय विशेष युद्धविराम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया है। अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने इस पहल में दोनों देशों के सहयोग की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि यह समझौता भविष्य में स्थायी शांति की नींव बन सकता है।
मेलानिया ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यूक्रेन के ओलेश्की क्षेत्र में 27 अक्टूबर को शुरू हुआ युद्धविराम 1 नवंबर को निर्धारित समय के अनुसार समाप्त हो गया। इस दौरान युद्ध प्रभावित क्षेत्र में जरूरी मानवीय सहायता पहुंचाई गई और लगभग 800 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
उन्होंने कहा कि इस मानवीय मिशन के माध्यम से प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वच्छ पानी और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने में सफलता मिली। उन्होंने रूस और यूक्रेन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि ओलेश्की में हुआ यह सहयोग दोनों देशों के बीच लंबे समय तक शांति कायम करने का आधार बन सकता है।
यह स्थानीय स्तर का युद्धविराम समझौता यूक्रेन के संसदीय मानवाधिकार आयुक्त दिमित्रो लुबिनेट्स और रूस की मानवाधिकार आयुक्त याना लांत्रातोवा के बीच हुई बातचीत के माध्यम से तैयार किया गया था। इस प्रक्रिया में मेलानिया ट्रंप ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी मेलानिया ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने बताया कि युद्धविराम के दौरान ओलेश्की की ओर जाने वाली सड़कों से बारूदी सुरंगें हटाई गईं और वहां मानवीय सहायता पहुंचाई गई। इसके अलावा, जिन लोगों को क्षेत्र से बाहर निकालने की जरूरत थी, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। यूक्रेनी नागरिकों ने चेर्निहाइव क्षेत्र के रास्ते यूक्रेन में प्रवेश किया।
इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने कभी भी जेलेंस्की के साथ बातचीत करने से इनकार नहीं किया है। रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, उन्होंने कहा कि यदि जेलेंस्की बातचीत को लेकर गंभीर हैं तो वे मॉस्को आ सकते हैं।
हालांकि, पांच दिनों का यह युद्धविराम केवल मानवीय सहायता पहुंचाने और लोगों की सुरक्षित निकासी तक सीमित रहा। इसे रूस और यूक्रेन के बीच पूर्ण युद्ध समाप्त करने का समझौता नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद इस पहल को दोनों देशों के बीच सहयोग और भविष्य में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।






