नई दिल्ली, 2 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): मीडिया जगत की प्रमुख हस्ती और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ कथित ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) को हुए 1,322 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नुकसान से जुड़ा है।
अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की है। आरोप है कि सुभाष चंद्रा ने वित्तीय संस्थान से बड़े ऋण हासिल करने के लिए अपनी निजी संपत्ति का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और बाद में ऋण की अदायगी नहीं की।
LICHFL की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत के मुताबिक, सुभाष चंद्रा ने दो अलग-अलग ऋणों की मंजूरी लेने के लिए अपनी कुल संपत्ति लगभग 59,000 करोड़ रुपये दर्शाने वाला नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा करवाया था। बताया गया है कि यह प्रमाणपत्र 28 मार्च, 2018 को DJM एंड कंपनी की ओर से जारी किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस प्रमाणपत्र के जरिए वित्तीय संस्थान को गुमराह कर ऋण हासिल किए गए।
शिकायत के अनुसार, पहला ऋण 500 करोड़ रुपये का वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, जिसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणदाता था। वहीं, दूसरा ऋण 480 करोड़ रुपये का डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणदाता था। दोनों ऋणों की कुल राशि 980 करोड़ रुपये थी।
LICHFL का दावा है कि ऋणों की अदायगी नहीं होने के कारण ब्याज और अन्य बकाया राशि सहित उसे कुल 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पहला ऋण कारोबार के विस्तार और अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए मंजूर किया गया था, जबकि दूसरा ऋण किराये से होने वाली आय के आधार पर रेंटल डिस्काउंटिंग योजना के तहत दिया गया था। दोनों ऋणों के लिए सुभाष चंद्रा की ओर से व्यक्तिगत गारंटी दिए जाने का भी दावा किया गया है।
इस मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू कर्ज की वसूली के लिए चल रही कानूनी कार्रवाई है। LICHFL ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का भी रुख किया था और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की ओर से मंजूर की गई पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था।
बताया गया है कि इस योजना के तहत चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति से लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये की वसूली का प्रावधान किया गया था।
फिलहाल, सुभाष चंद्रा की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईडी द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद अब जांच के दौरान ऋण की राशि के इस्तेमाल, संपत्तियों के विवरण और कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जाएगी।
हालांकि, फिलहाल ये सभी आरोप हैं। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






