पंचकूला , 2 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक रास्ते और विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश के लोगों की खुशहाली सभी का साझा लक्ष्य है। हम सभी की पहचान इस बात से है कि हम हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों को समझते हुए प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें।
मुख्यमंत्री सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। हीरक जयंती (डायमंड जुबली) के इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन शानदार अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की उपस्थिति से इसकी गरिमा बढ़ी है। संसदीय प्रक्रियाओं, सदन की मर्यादा और जनप्रतिनिधियों के कर्तव्यों पर उनका मार्गदर्शन सभी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि हीरक जयंती समारोह में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भी शिरकत कर हरियाणा की जनता को अपना आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की 60 वर्षों की विकास यात्रा केवल सड़कों, संस्थानों और उद्योगों के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की मेहनत भी शामिल है। खेतों की हरियाली से लेकर उद्योगों की ऊंचाइयों तक, गांवों की पगडंडियों से आधुनिक एक्सप्रेस-वे तक और अखाड़ों की मिट्टी से विश्व के खेल मंचों तक हरियाणा ने अपनी मेहनत, हौसले और संकल्प से प्रगति के नए अध्याय लिखे हैं। प्रदेश की उपलब्धियों की नींव उन चर्चाओं, फैसलों और कानूनों से भी पड़ी है, जिन्हें जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में आकार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था और उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 81 हो गई और वर्ष 1977 में यह संख्या 90 हो गई। उन्होंने कहा कि अब इन सीटों की संख्या में वृद्धि की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और आम जनता को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश अपनी 15वीं विधानसभा के दौर में लोकतांत्रिक यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। ये आंकड़े प्रतिनिधित्व के विस्तार और जनता की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर, 1966 को हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। उस समय संसाधन सीमित थे और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, बिजली, सड़क तथा प्रशासनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने उन सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इन परिस्थितियों में प्रदेश के भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि संविधान के प्रति सम्मान हमारे फैसलों और आचरण में दिखाई देना चाहिए। संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श शामिल हैं। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे इन आदर्शों को शासन की कार्यप्रणाली में अपनाएं। जब योग्य नागरिक को बिना किसी भेदभाव के उसका अधिकार मिलता है, कमजोर व्यक्ति की बात सुनी जाती है और समाज में आपसी सम्मान बढ़ता है, तभी इन संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा कानून बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग को मंजूरी देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। सदन में उठाया गया सार्थक सवाल किसी गांव की समस्या को समाधान तक पहुंचा सकता है और किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकता है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट चर्चा और समितियों का काम संसदीय व्यवस्था को जीवंत बनाता है। इन प्रक्रियाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए अध्ययन, तैयारी और जनता के साथ निरंतर संपर्क जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जवाबदेही शासन को मजबूत बनाती है। विपक्ष की ओर से उठाए गए जनहित के मुद्दों को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। इसी तरह आलोचना के साथ व्यावहारिक सुझाव देना भी सार्वजनिक जीवन की बड़ी सेवा है। सदन में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को तर्कों के आधार पर एक-दूसरे के विचारों को चुनौती देनी चाहिए और अपने आचरण से लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना चाहिए।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों के जरिए नागरिक जनप्रतिनिधियों के शब्दों और व्यवहार को तुरंत देखते हैं। विशेष रूप से नई पीढ़ी उनसे सीखती है कि सार्वजनिक जीवन में असहमति किस तरह व्यक्त की जाती है। इसलिए तथ्यों की पुष्टि करना, व्यक्तिगत आरोपों से बचना और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल करना जरूरी है। चुनाव समाप्त होने के बाद जनप्रतिनिधि अपने पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान पखवाड़े की सार्थकता तभी बढ़ेगी, जब इसकी चर्चा सभागारों से निकलकर गांवों, स्कूलों और बस्तियों तक पहुंचेगी। नागरिकों को सरल भाषा में विधानसभा की कार्यप्रणाली, कानून बनने की प्रक्रिया, बजट की प्राथमिकताओं और जनसमस्याओं को उठाने के तरीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करना होगा। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, महिलाओं का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने वर्तमान और पूर्व विधायकों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संविधान संवाद आयोजित करें। स्कूलों और कॉलेजों में युवा संसद, संविधान की प्रस्तावना का पाठ और स्थानीय समस्याओं पर विचार-विमर्श जैसे प्रयास किए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली और संविधान में निहित मूल्यों को समझने का अवसर मिलेगा तथा लोकतंत्र के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी बेहद जरूरी है। किसी क्षेत्र की जरूरतों को वहां रहने वाले लोग सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। इसलिए विकास की प्राथमिकताएं तय करते समय महिलाओं, किसानों, मजदूरों, युवाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को सरकार और समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बनना चाहिए। जब योजनाओं के निर्माण में नागरिक भागीदार होता है, तो उनके क्रियान्वयन और सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति उसका जुड़ाव भी बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत में हरियाणा की भूमिका अभी से तैयार करनी होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, आधुनिक कृषि और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित शहरी विकास पर गंभीरता से काम करना होगा। नई तकनीक के अवसर हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए और विकास का लाभ गांव तथा शहर दोनों को मिलना चाहिए। खुशहाली के साथ-साथ सामाजिक विश्वास और नागरिकों का सम्मान भी बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी विरासत ऐसा हरियाणा होना चाहिए, जहां सभी के लिए समान अवसर हों, प्रत्येक नागरिक को सम्मान मिले और लोकतंत्र में जनता का विश्वास लगातार मजबूत हो। आने वाली पीढ़ियां हमसे पूछेंगी कि जब हमारे पास फैसले लेने का अवसर था, तब हमने उनके लिए क्या किया। इसका जवाब हमारे कार्यों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे सदन की मर्यादा बढ़ाएंगे, जनसंवाद को मजबूत करेंगे और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में अपनाएंगे।






