लुधियाना, 03 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज विश्वविद्यालय, लुधियाना के शिक्षकों ने कृषि एवं पशुधन अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए ‘सोसाइटी ऑफ इकोनॉमिक्स एंड डेवलपमेंट’से दो प्रतिष्ठित शोध सम्मान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।
पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला में आयोजित सोसाइटी के 7वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान, ‘भैंसों से जुड़ा विरोधाभास: पंजाब के डेयरी क्षेत्र में पशुओं की संख्या में कमी, उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि और प्रजातियों में बदलाव का अर्थशास्त्र’शीर्षक वाले शोध पत्र को ‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति’ सम्मान से नवाजा गया। यह शोध पत्र डॉ. इंद्रप्रीत कौर, डॉ. श्रुति चोपड़ा, हनीश शर्मा, डॉ. बलबीर बगीचा सिंह धालीवाल और डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया था।
यह शोध पंजाब के डेयरी क्षेत्र में हो रहे बदलावों की पड़ताल करता है। इसमें भैंसों की संख्या में कमी के बावजूद उनकी उत्पादकता में हो रही वृद्धि के पहलू को उजागर किया गया है। इसके साथ ही, उन आर्थिक एवं नीतिगत कारकों का भी विश्लेषण किया गया है, जो डेयरी क्षेत्र में अन्य पशु प्रजातियों की ओर बढ़ते रुझान को प्रभावित करते हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, डॉ. श्रुति चोपड़ा को सोसाइटी द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र सम्मान 2024’ प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके शोध पत्र ‘पंजाब में किसान उत्पादक संगठनों की सफलता अथवा असफलता के कारक: साक्ष्य एवं प्रभाव’ के लिए दिया गया, जो ‘इंडियन जर्नल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड डेवलपमेंट’ में प्रकाशित हुआ था। यह अध्ययन पंजाब में किसान उत्पादक संगठनों के प्रदर्शन, सफलता एवं स्थिरता को प्रभावित करने वाले कारकों की जांच करता है तथा किसान समूहों को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर प्रकाश डालता है।
डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस चांसलर ; डॉ. सर्वप्रीत सिंह घुम्मण, डीन, डेयरी एवं फूड साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेज तथा विभागाध्यक्ष डॉ. इंद्रप्रीत कौर ने शिक्षकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी और उनके शोध योगदान एवं शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां विश्वविद्यालय के बढ़ते शैक्षणिक कद तथा कृषि एवं पशुपालन क्षेत्रों की उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए किए जा रहे शोध की प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने शिक्षकों को ऐसी प्रभावशाली शोध गतिविधियां जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिनके परिणाम व्यावहारिक स्तर पर उपयोगी होने के साथ-साथ नीतिगत निर्णय लेने में भी सहायक सिद्ध हों।






