श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, 03 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): फतेहगढ़ साहिब के पंजाबी विभाग द्वारा 1984 के सिख जनसंहार को समर्पित संगोष्ठी और पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उपकुलपति (वाईस चांसलर) प्रो. प्रीत पाल सिंह ने की। इस अवसर पर प्रो. सुखविंदर सिंह बिलिंग, डीन अकादमिक मामले, विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्य वक्ताओं के रूप में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से प्रो. परमवीर सिंह और प्रो. गुरमुख सिंह ने शिरकत की। पुस्तक के लेखक गुरजंट सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सिकंदर सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्रों को 1984 की घटनाओं के बारे में जागरूक किया। लेखक गुरजंट सिंह ने अपनी पुस्तक के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में जाकर जनसंहार से संबंधित आंकड़े एकत्र किए हैं। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के कई हिस्सों में सिखों को निशाना बनाया गया।
प्रो. गुरमुख सिंह ने ऐसी घटनाओं पर चुप रहने के बजाय व्यापक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया और महिलाओं पर हुए अत्याचारों का विशेष उल्लेख किया। प्रो. परमवीर सिंह ने 1984 की त्रासदी और उत्तराखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों में सिखों पर हुए अत्याचारों के बारे में अपने विचार साझा किए। उपकुलपति प्रो. प्रीत पाल सिंह ने कहा कि 1984 के प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही को रिकॉर्ड करना अत्यंत आवश्यक है और दशकों बाद भी सिख न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
इसके बाद गुरजंट सिंह की पुस्तक ‘सिख-नसलाकुशी दा खुरा-खोज’ का लोकार्पण किया गया। अंत में डॉ. सिकंदर सिंह ने अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का धन्यवाद व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. हरप्रीत कौर ने किया। समारोह में विभिन्न विभागों के शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।






