कुरुक्षेत्र, 3 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक गिरीश नागपाल ने कहा कि जिले में अब तक पराली जलाने की कुल 3 घटनाएं सामने आई हैं, जो गांव धुराला, मंगोली जट्टान एवं टाटकी में पाई गई हैं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा संबंधित किसानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई गई है। कृषि विभाग की टीमों द्वारा मौके पर पहुंचकर आगजनी की घटनाओं का निरीक्षण किया गया तथा संबंधित किसानों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्यवाही की गई है तथा किसानों के चालान काटकर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है।
इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 173 के तहत एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक गिरीश नागपाल ने आज यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित किसानों के खेत के खसरा नंबर में राजस्व विभाग के माध्यम से रेड एंट्री दर्ज करवाने की कार्रवाई भी की जाएगी, जिससे संबंधित किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में नियमानुसार प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि प्रचुर मात्रा में इन-सीटू एवं एक्स-सीद् पराली प्रबंधन हेतु संसाधन उपलब्ध हैं। कृषि विभाग, राजस्व विभाग ग्राम पंचायत एवं अन्य संबंधित विभागों की टीमें गांव-गांव जाकर खेतों की निगरानी कर रही हैं। संवेदनशील गांवों एवं पूर्व में पराली जलाने की घटनाओं वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए ग्राम सभाओं एवं जागरूकता बैठकों का आयोजन भी किया जा रहा है, ताकि किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान एवं इसके उचित प्रबंधन के तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके।
उन्होंने कहा कि धान की पराली को खेत में जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं तथा मिट्टी की जैविक गुणवत्ता एवं उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों एवं सांस संबंधी समस्याओं से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। आगजनी की घटनाओं से खेतों के आसपास खड़ी फसलों, पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर बेलर एवं अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का उपयोग करें। इसके माध्यम से पराली को खेत में मिलाकर मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है अथवा गांठें बनाकर अन्य उपयोगों के लिए भेजा जा सकता है। इस प्रकार किसान फसल अवशेषों का सदुपयोग कर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए ने में भी योगदान दे सकते हैं।
कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे धान की पराली एवं अन्य फसल अवशेषों को बिल्कुल भी आग न लगाएं तथा उपलब्ध संसाधनों एवं कृषि यंत्रों की सहायता से उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। किसान प्रशासन का सहयोग करें और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।






