Wednesday, November 4, 2026
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हरियाणा लोक सेवा आयोग (राज्य सेवा समूह-ग) नियम, 2002 में संशोधन को मंत्रिमंडल की मंजूरी

नवसृजित ग्रुप-सी के पदों को शामिल करने और सेवा संबंधी प्रावधानों को नवीनतम नियमों के अनुरूप बनाने के लिए किया गया संशोधन

चंडीगढ़, 3 नवंबर, 2026 (संजीव शर्मा):  मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (राज्य सेवा समूह-ग) नियम, 2002 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। इन संशोधनों का उद्देश्य आयोग में नवसृजित ग्रुप-सी के पदों को शामिल करना और मौजूदा प्रावधानों को नवीनतम सरकारी नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप बनाना है।

इन संशोधनों के माध्यम से हरियाणा लोक सेवा आयोग में ग्रुप-सी के विभिन्न पदों की स्वीकृत संख्या को अपडेट किया जाएगा। आयोग में परीक्षाओं की बढ़ती संख्या और अन्य संबंधित कार्यों के कारण कार्यभार में हुई वृद्धि को देखते हुए यह संशोधन आवश्यक हो गया था।

संशोधित नियमों के अनुसार आयोग में ग्रुप-सी के कुल 85 स्वीकृत पद होंगे, जिनमें 15 नवसृजित पद शामिल हैं। इनमें एक सेक्शन ऑफिसर, तीन डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, एक पर्सनल असिस्टेंट, 25 असिस्टेंट, दो सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, दो जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, छह स्टेनो टाइपिस्ट, 13 ड्राइवर, 29 क्लर्क, एक रेस्टोरर और दो गैस्टेटनर ऑपरेटर के पद शामिल हैं।

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर संशोधनों में इन पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता संबंधी शर्तों में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत तिब्बती शरणार्थियों और पाकिस्तान, बर्मा, श्रीलंका तथा कुछ पूर्वी अफ्रीकी देशों से भारत में प्रवास करने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों से संबंधित मौजूदा प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है। अब पात्रता भारत के नागरिकों तथा नेपाल और भूटान के नागरिकों तक सीमित होगी। हालांकि, नेपाल और भूटान के नागरिकों की नियुक्ति इस शर्त पर होगी कि उन्हें सरकार द्वारा पात्रता प्रमाणपत्र जारी किया गया हो।

इसके अतिरिक्त, नियम 13 के तहत अनुशासनात्मक मामलों, अपील और अन्य सेवा संबंधी मामलों के प्रावधानों को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के अनुरूप किया जाएगा। इस संबंध में वर्ष 1987 के पुराने नियमों के संदर्भ को बदला जाएगा। संशोधनों में लागू नियमों के अनुसार सक्षम अधिकारियों का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण संशोधन के तहत नियमों के परिशिष्ट-ख में मैट्रिक स्तर तक हिंदी विषय अनिवार्य होने की शर्त में भी बदलाव किया जाएगा। अब इसके स्थान पर मैट्रिक स्तर पर हिंदी या संस्कृत में से कोई एक विषय अथवा उच्च शिक्षा स्तर पर हिंदी विषय पढ़ा होना मान्य होगा।

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