कुरुक्षेत्र, 5 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि हरियाणा के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान यदि किसी मतदाता का नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है तो वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकता है। यह प्रावधान सभी पात्र नागरिकों पर लागू होगा चाहे उनका नाम पहले किसी मतदाता सूची में शामिल रहा हो या नहीं। यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है तो उसे एसआईआर के दौरान या इसके बाद मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने के लिए नए सिरे से फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन करना होगा।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि पूर्व में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद फॉर्म-6 भरने मात्र से किसी प्रकार की गलत घोषणा या कानूनी कार्रवाई का आधार नहीं बनेगा। इस संबंध में माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा नीलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य (डब्लयूपी(सी) नंबर 14955/2026, निर्णय दिनांक 14.10.2026) के मामले में भी यही स्थिति स्पष्ट की गई है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार किसी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा केवल इस आधार पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी कि आवेदक का नाम पहले मतदाता सूची में शामिल था और उसने एसआईआर के दौरान अथवा उसके बाद फॉर्म-6 प्रस्तुत किया है। हालांकि इसके लिए यह आवश्यक है कि संबंधित मतदाता का नाम किसी अन्य संसदीय व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो तथा उसके द्वारा की गई घोषणा कानून के अनुरूप हो।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नागरिकों को इस विषय में निरंतर जागरूक किया जाए ताकि आमजन में किसी प्रकार की भ्रांति या आशंका न रहे और कोई भी पात्र नागरिक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवाने से वंचित न रहे। यह जानकारी उन सभी पात्र मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनका नाम एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता है। ऐसे मतदाता अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगामी विशेष अभियान अथवा मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 प्रस्तुत कर सकते है।






