कुरुक्षेत्र, 6 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष-पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से किसानों को पराली न जलाने, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
डीडीए डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना, पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखना तथा कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है। अभियान के अंतर्गत किसानों को गांव-गांव जाकर पराली प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जा रही है। किसानों के साथ बैठक, जागरूकता कार्यक्रम, संवाद एवं व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से उन्हें फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। किसानों को समझाया जा रहा है कि पराली जलाना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे भूमि, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचता है। किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद जैविक तत्व, मित्र कीट और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे भूमि की प्राकृतिक उर्वरता शक्ति प्रभावित होती है और लंबे समय में उत्पादन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। धुएं के कारण सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। इसमें मुख्य रूप से सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर, रोटावेटर और बेलर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में बताया जा रहा है।






