कुरुक्षेत्र, 6 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि खरीफ खरीद सीजन 2026-27 के दौरान कुरुक्षेत्र जिले की मंडियों एवं खरीद केंद्रों में धान खरीद, उठान और किसानों को भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कुरुक्षेत्र से प्राप्त 5 नवंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार जिले में विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा कुल 8,84,173 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें से 8,52,786 मीट्रिक टन धान का उठान भी किया जा चुका है, जो कुल खरीद का लगभग 96 प्रतिशत है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि धान खरीद के आंकड़ों के अनुसार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा अब तक 6,48,416 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जबकि हैफेड द्वारा 2,35,757 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। इस प्रकार दोनों एजेंसियों ने मिलकर 8,84,173 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। डीएफएसएसी द्वारा खरीदे गए धान में से 6,27,211 मीट्रिक टन का उठान किया जा चुका है, जो लगभग 97 प्रतिशत है। इसी प्रकार हैफेड द्वारा खरीदे गए 2,35,757 मीट्रिक टन धान में से 2,25,575 मीट्रिक टन का उठान किया गया है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। दोनों एजेंसियों का कुल उठान 8,52,786 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। किसानों को फसल का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के मामले में भी खरीद एजेंसियों द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक किसानों को कुल 2,077.63 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय भुगतान राशि का लगभग 99 प्रतिशत है। कुल भुगतान देय राशि 2,098.71 करोड़ रुपए है, जिसमें से लगभग 21.07 करोड़ रुपए का भुगतान शेष है।
उन्होंने कहा कि एजेंसी वार भुगतान की स्थिति के अनुसार डीएफएससी द्वारा 1,529.84 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, जबकि हैफेड द्वारा 547.80 करोड़ रुपए किसानों के खातों में जारी किए गए हैं। दोनों एजेंसियों द्वारा भुगतान की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें से 5 नवंबर को एक ही दिन में किसानों को कुल 22.75 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इसमें डीएफएससी द्वारा लगभग 16.69 करोड़ रुपए तथा हैफेड द्वारा लगभग 6.07 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। जिले में धान खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए संबंधित खरीद एजेंसियों द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। खरीद के साथ-साथ उठान में तेजी लाने और किसानों को उनकी फसल की निर्धारित राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।






