Wednesday, August 26, 2026
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पटियाला फ़ाउंडेशन ने ‘प्रोजेक्ट पृथ्वी’ के तहत ‘इको-लैब्स’ शुरू किया है; पटियाला के 10 स्कूलों में लाइव एनवायरनमेंटल लैबोरेटरी (पर्यावरण प्रयोगशालाएं) बनाई जाएंगी।

पटियाला, 6 अगस्त 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पर्यावरण संरक्षण और अनुभवात्मक शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, पटियाला फाउंडेशन ने प्रोजेक्ट पृथ्वी के तहत ईकोलैब्स की औपचारिक शुरुआत की है। यह एक अग्रणी पहल है जिसके अंतर्गत पटियाला के दस चयनित स्कूलों में जीवंत पर्यावरण प्रयोगशालाएँ (लिविंग एनवायरनमेंट लैब्स) स्थापित की जाएंगी। इन स्कूलों का चयन कार्यक्रम के लिए आवेदन करने वाले अनेक विद्यालयों के विस्तृत मूल्यांकन और विश्लेषण के बाद किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल परिसरों को स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के जीवंत केंद्रों में बदलना है, जहाँ विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक गतिविधियों और दैनिक सहभागिता के माध्यम से भी पर्यावरण संरक्षण सीखेंगे।

यह पहल एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड के उदार सहयोग से संभव हो सकी है। कंपनी की सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) साझेदारी युवा विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी, सतत विकास और जलवायु लचीलापन (क्लाइमेट रेज़िलिएंस) को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ईकोलैब्स कार्यक्रम को एक समग्र पर्यावरण शिक्षा मॉडल के रूप में तैयार किया गया है, जो कक्षा में मिलने वाली शिक्षा को क्षेत्रीय एवं व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ता है। प्रत्येक ईकोलैब एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में कार्य करेगी, जहाँ विद्यार्थी अपने आसपास के पर्यावरण का अवलोकन, प्रयोग, दस्तावेजीकरण और संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
परियोजना के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ ग्रीनवेल पब्लिक स्कूल और पोडार इंटरनेशनल स्कूल, पटियाला में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के साथ किया गया। इन कार्यक्रमों में स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, ईको क्लब के सदस्यों और विद्यार्थियों को ईकोलैब्स की अवधारणा, उद्देश्य और कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया।
पटियाला फाउंडेशन ने ग्रीनवेल पब्लिक स्कूल की प्राचार्य श्रीमती समरेज़ जहाँ और स्कूल समन्वयक श्रीमती नीना का कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके उत्साहपूर्ण सहयोग और प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। इसी प्रकार, पोदार इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य श्रीमती जसप्रीत संधू और स्कूल समन्वयक श्रीमती ज्योति की भी इस पहल को अपनाने तथा विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित करने हेतु सराहना की गई।
ईकोलैब्स की शुरुआत पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार विद्यार्थियों की नई पीढ़ी तैयार करने की एक दीर्घकालिक पहल है। सहभागी स्कूलों में ईको क्लबों की स्थापना और उन्हें सशक्त बनाकर विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने, सतत जीवनशैली अपनाने तथा अपने स्कूलों और समुदायों में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले युवा नेतृत्वकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
पर्यावरण शिक्षा को केवल एक अलग विषय के रूप में देखने के बजाय, ईकोलैब्स का उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से विद्यार्थियों के दैनिक जीवन में स्थिरता को शामिल करना है।
ईकोलैब्स कार्यक्रम छह परस्पर जुड़े विषयों पर आधारित है, जो समग्र पर्यावरण प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं। इनमें शामिल हैं—
  • जल संरक्षण – जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण को बढ़ावा देना।
  • मृदा स्वास्थ्य – स्वस्थ मिट्टी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को समझना।
  • सूखी पत्तियों से कम्पोस्ट बनाना – जैविक कचरे को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदलना।
  • बर्ड केयर (चिड़ियों की देखभाल) – पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास तैयार कर शहरी जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
  • जैव विविधता संरक्षण – स्थानीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और उनकी सराहना करना।
  • ईको क्लब गतिविधियाँ एवं पर्यावरण नेतृत्व – विद्यार्थियों को पर्यावरणीय अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामुदायिक स्तर पर स्थिरता संबंधी पहलों का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाना।
इस अभिनव पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों को जैविक कचरे से खाद तैयार करना, जल संरक्षण करना, पक्षियों के अनुकूल स्थान विकसित करना, अपने परिसर की जैव विविधता का दस्तावेजीकरण करना तथा अपने स्कूल और समुदाय में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान चलाने जैसी व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण दूत बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
ओरिएंटेशन कार्यक्रमों का समापन ईको प्लेज (Eco Pledge) के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण की रक्षा करने और अपने दैनिक जीवन में सतत जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
ईकोलैब्स की अवधारणा और महत्व पर प्रकाश डालते हुए, पटियाला फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ श्री रवि सिंह आहलूवालिया ने कहा—

“पर्यावरण शिक्षा केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे व्यवहारिक कार्रवाई तक पहुँचना चाहिए। ईकोलैब्स को जीवंत कक्षाओं के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ प्रत्येक बच्चा कार्य करके सीखता है, प्रकृति को निकट से समझता है और यह महसूस करता है कि उसकी छोटी-सी व्यक्तिगत पहल भी हमारे ग्रह की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। आज के विद्यार्थी केवल पर्यावरणीय पहलों के लाभार्थी नहीं, बल्कि कल के पर्यावरण नेता हैं।”

उन्होंने आगे कहा—

“प्रोजेक्ट पृथ्वी हमारी उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके माध्यम से हम ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो प्रकृति का सम्मान करे, जैव विविधता का महत्व समझे और सतत जीवनशैली को अपनाए। स्कूलों में जीवंत पर्यावरण प्रयोगशालाएँ स्थापित कर हम ऐसे शैक्षणिक संस्थान विकसित करना चाहते हैं, जहाँ पर्यावरणीय जिम्मेदारी केवल एक गतिविधि न होकर जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जाए।”

प्रोजेक्ट पृथ्वी के माध्यम से पटियाला फाउंडेशन पर्यावरण के प्रति जागरूक स्कूलों का एक ऐसा नेटवर्क विकसित करने की कल्पना करता है, जो सतत परिसर प्रबंधन के आदर्श मॉडल बनें और आसपास के समुदायों को भी इसी प्रकार की पहलों को अपनाने के लिए प्रेरित करें। ईकोलैब्स कार्यक्रम से पर्यावरण साक्षरता को मजबूत करने, युवाओं में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने तथा भारत के जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान देने की अपेक्षा की जा रही है।
फाउंडेशन ने दोहराया कि दस स्कूलों में ईकोलैब्स की स्थापना केवल शुरुआत है। यह हरित शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण, विद्यार्थियों के नेतृत्व वाली पर्यावरणीय पहलों को सशक्त बनाने तथा शिक्षा, सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से अधिक सक्षम और पर्यावरण-अनुकूल समुदायों के निर्माण की दिशा में एक व्यापक आंदोलन की शुरुआत है।
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