Wednesday, August 26, 2026
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पंजाबी विश्वविद्यालय में लोकगीतों के संग्रह और सांस्कृतिक अध्ययन के महत्व पर प्रो. नाहर सिंह का विशेष व्याख्यान

पटियाला, 20 अगस्त,2026 (राजेश कुमार): पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के पंजाबी विभाग के प्रमुख डॉ. राजवंत कौर पंजाबी के नेतृत्व में विभाग की साहित्य सभा की ओर से सेमिनार हॉल में ‘लोकगीतों का संग्रह, संपादन और सांस्कृतिक मानव-विज्ञानात्मक अध्ययन’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंजाबी लोकधारा क्षेत्र के प्रसिद्ध विद्वान प्रोफेसर नाहर सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए लोकगीतों के वैज्ञानिक संग्रह, प्रमाणिक संपादन और सांस्कृतिक अध्ययन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत भाषाओं के डीन प्रोफेसर सुरजीत सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर नाहर सिंह का लोक-साहित्य के क्षेत्र में योगदान पंजाब की लोक-विरासत को संरक्षित करने और इसे अकादमिक स्तर पर स्थापित करने में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में लोक-साहित्य एवं लोकधारा का वैज्ञानिक ढंग से संग्रह और अध्ययन समय की प्रमुख आवश्यकता है। अपने व्याख्यान के दौरान प्रोफेसर नाहर सिंह ने कहा कि लोकगीत किसी भी समाज की सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक पहचान, लोक-विश्वासों, सामाजिक संबंधों और ऐतिहासिक चेतना के जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि लोकगीतों का अध्ययन केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मानव-विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास और भाषाविज्ञान के अंतर-विषयक संदर्भ में भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने लंबे शोध-अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोक-साहित्य का प्रमाणिक संग्रह क्षेत्रीय सर्वेक्षण, मौखिक स्रोतों और लोक-समाज के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने नए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए अपील की कि वे मूल स्रोतों से जुड़कर तथ्य-आधारित, वैज्ञानिक और अंतर-विषयक दृष्टिकोण से शोध कार्य करें, ताकि पंजाब की समृद्ध लोक-विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके।

व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने लोक-साहित्य एवं शोध-पद्धति से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका प्रोफेसर नाहर सिंह ने तथ्यपूर्ण और विश्लेषणात्मक उत्तर दिया। इस मुख्य व्याख्यान के मंच संचालन की भूमिका साहित्य सभा के प्रभारी डॉ. गुरसेवक सिंह लांबी ने निभाई। पंजाबी विभाग के पूर्व प्रोफेसर राजिंदरपाल सिंह बराड़ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्रोफेसर चरणजीत कौर बराड़, दलजीत अमी सहित पंजाबी विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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