संगरुर,03 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज भाजपा-अकाली दल गठबंधन पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा तीन काले कृषि कानूनों को वापस लाने की शर्त पर अकाली दल से समझौता करने की तैयारी कर रही है, जबकि इन कानूनों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 750 किसानों की जानें गई थीं। उन्होंने कहा कि अकाली दल सियासी कुर्सी के लिए “पंजाब में कुछ भी बेचने” को तैयार है, जबकि पंजाबी अपने शहीद किसानों के शवों के ऊपर से गुजर कर भाजपा को कभी वोट नहीं देंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भाजपा वोट हासिल करने के लिए सांप्रदायिक एजेंडा इस्तेमाल कर रही है और पंजाब यूनिवर्सिटी के चुनावों में इसकी जीत, जो अकाली दल के समर्थन से हुई है, ने दोनों पार्टियों के बीच की मिलीभगत को उजागर कर दिया है। इस राजनीति की तुलना अपनी सरकार के प्रदर्शन से करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, बिजली, पानी और सड़कों के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कामों से पंजाब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
‘लोक मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकालियों ने प्रदेश के हितों के विपरीत विरोधी ताकतों से हाथ मिलाकर हमेशा पंजाब विरोधी रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अकाली-भाजपा गठबंधन महज सियासी फायदे के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अकाली सत्ता की खातिर भाजपा से हाथ मिलाने को तैयार हैं, इस तथ्य के बावजूद कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की शहादत के लिए जिम्मेदार थी। यह दर्शाता है कि अकाली नेतृत्व के पास कोई विचारधारा नहीं बची है और वह सत्ता के लिए पंजाब के हितों से समझौता करने को तैयार है।”

मुख्यमंत्री ने लोगों को चेतावनी दी कि अगर अकाली-भाजपा गठबंधन सत्ता में आता है तो वह किसानों पर फिर से काले कृषि कानून थोप सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विधान सभा चुनावों से पहले शिरोमणि अकाली दल का नेतृत्व भाजपा से गठबंधन करने के लिए “बेताब” है। उन्होंने कहा, “अकाली-भाजपा गठबंधन की कोई विचारधारा नहीं है और जन कल्याण का कोई एजेंडा नहीं है। इसका एकमात्र मकसद पंजाब में सत्ता हासिल करना है। पंजाब के लोग इन पार्टियों के सियासी ड्रामों में नहीं आएंगे और आने वाले दिनों में इन्हें उचित सबक सिखाएंगे।”
उन्होंने कहा, “पंजाबी अकालियों और भाजपा को पंजाब और इसके लोगों के खिलाफ किए गए अपराधों के कारण सियासी गुमनामी में भेज देंगे। इस ‘लोक मिलनी’ में लोगों की भारी मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पंजाबी 2027 में एक नई कहानी लिखने के लिए तैयार हैं।”
2022 में पद संभालने के बाद अपनी सरकार द्वारा किए गए कामों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार ने सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया है और बिजली, खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सुधार लागू किए हैं। उन्होंने कहा, “आज साढ़े चार साल बाद मैं लोगों से किया हर वादा पूरा करने और सभी गारंटियां निभाने के बाद लोगों के सामने खड़ा हूं। पिछली सरकारों के शासन के दौरान लोग डर के माहौल में जीते थे, जबकि नशे ने पंजाब की पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया।”
विरोधी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग कांग्रेस, अकाली और भाजपा को उनकी पंजाब विरोधी नीतियों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और 2027 के विधान सभा चुनावों में उन्हें राजनीतिक गुमनामी में धकेल देंगे।

उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक सियासी पार्टियां सत्ता में रहते हुए हमेशा एक-दूसरे के हितों की रक्षा करती रही हैं और राज करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हुए “उतर काटो मैं चढ़ां” की खेल खेलती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनकी आपसी मिलीभगत ने यह सुनिश्चित किया कि इनके कुकर्म छिपे रहें। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अब लोगों ने आप को चुना है और झाड़ू पंजाब की सियासी व्यवस्था की सफाई कर रहा है। वह दिन दूर नहीं, जब अपने अपराधों के जिम्मेदार लोगों को अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।”
नशे की बीमारी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक सियासी पार्टियों ने पंजाब की जवानी का बहुत नुकसान किया है और लोग जानते हैं कि नशे के कारोबार को किसने फैलने दिया। उन्होंने कहा, “नशे के कारोबार को बढ़ावा देने और संरक्षण देने वालों को सत्ता में वापस आने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर ये पार्टियां वापस आईं तो वे पंजाब और इसके लोगों का शोषण करने के लिए एक बार फिर अधिकारों का दुरुपयोग करेंगी।”
अकाली नेता सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे पंजाब की जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी सुख-सुविधाओं और आलीशान माहौल में बिताई है। उन्होंने कहा, “सुखबीर सिंह बादल कॉन्वेंट में पढ़े नेता हैं, जो पंजाब की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी नहीं जानते लेकिन प्रदेश पर राज करना चाहते हैं। बाकी सब कुछ छोड़ो, वे पंजाब की बुनियादी फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें लोगों की बुनियादी समस्याओं की बहुत कम समझ है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने नशे के कारोबार को बढ़ावा देकर और संरक्षण देकर पंजाब की “पीढ़ियों का नुकसान” किया है। उन्होंने आगे कहा कि नशा बेचने या बांटने के लिए सरकारी वाहनों का इस्तेमाल किया गया और राजनीतिक हितों के लिए धर्म का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा, “निजी सियासी हितों के लिए धर्म का इस्तेमाल करना पाप है। अकाली नेताओं ने अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब के स को बेरहमी से लूटा और अब प्रदेश को फिर से लूटने के लिए दिल्ली से गठबंधन के सपने देख रहे हैं। उनके हित हमेशा अपने तक सीमित रसंसाधनों हे हैं, जबकि आप सिर्फ पंजाब और इसके लोगों के लिए प्रतिबद्ध है।”
कांग्रेस के आंतरिक कलह पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जहां कांग्रेसी नेता सियासी ताकत के लिए आपस में लड़ रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार लोगों की भलाई के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने कहा, “वे सत्ता के लिए आपस में झगड़ रहे हैं, जबकि हम रंगला पंजाब बनाने के लिए अथक मेहनत कर रहे हैं। हमारी लड़ाई मानक शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सेवा और लोगों के लिए कल्याण योजनाओं के लिए है। कांग्रेसी नेता एक-दूसरे से आंख भी नहीं मिलाते क्योंकि उनकी एकमात्र चिंता सत्ता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास पंजाब के लिए कोई विजन नहीं है और उसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना तथा राज्य के खजाने को लूटना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आंतरिक कलह का शिकार है और अपनी अंदरूनी लड़ाई के कारण खुद ही बिखर जाएगी। उन्होंने कहा, “यह अफसोस की बात है कि पार्टी नेताओं को एकजुट करने का दावा करके पंजाब आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को यह भी पता नहीं होता कि नेताओं के नाम का उच्चारण कैसे करना है। सत्ता में वापसी के उनके सपने कभी पूरे नहीं होंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और अकाली दल ने दीमक की तरह काम किया है, जिसने आजादी के बाद पंजाब को बर्बाद किया और राज्य को पीछे धकेल दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये नेता कभी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बोलते, लेकिन हर दिन मेरे खिलाफ जहर उगलते हैं, क्योंकि मैंने जनता के सामने उनकी असलियत उजागर कर दी है। पंजाबी इन पार्टियों के जनविरोधी रवैये को जानते हैं, क्योंकि ये कभी भी पंजाब और इसके लोगों के प्रति वफादार नहीं रहे।” अपनी सरकार की जनहितैषी शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी खजाने का एक-एक पैसा लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है, जबकि किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा, “टैक्स का पैसा जनता का है। हम इसे उनकी भलाई पर समझदारी से खर्च कर रहे हैं। स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के विकास के माध्यम से जनता का पैसा जनता के पास वापस पहुंच रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाने, 70,000 से अधिक युवाओं को बिना भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां देने, सड़कों की स्थिति सुधारने, टोल प्लाजा बंद करने, जिससे प्रतिदिन 70 लाख रुपये की बचत हो रही है, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने सहित कई प्रमुख पहल की हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गांवों के विकास के लिए अथक प्रयास कर रही है और इस उद्देश्य के लिए अनुदान उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा, “बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाने और युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद के लिए पूरे राज्य में 3,100 स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।”
स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ शुरू की है, जिसके तहत पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार का अधिकार है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना देश में अपनी तरह की पहली पहल है और इसने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए लोगों पर वित्तीय बोझ को काफी कम किया है। पंजाब ऐसी व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज प्रदान करने वाला पहला भारतीय राज्य है और परिवारों ने इस योजना के तहत मुफ्त उपचार का लाभ उठाया है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला लाभार्थियों को पहली जुलाई से वित्तीय सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा, “पंजाब से संबंधित प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये मिल रहे हैं, जबकि एससी महिलाओं को 1,500 रुपये मिल रहे हैं। राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है और पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं भी इसके लिए पात्र हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है और राज्य सरकार ने बजट में 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना पंजाब की महिलाओं के लिए एक उपहार है और यह दुनिया भर में देखी जा रही सबसे बड़ी सामाजिक क्रांतियों में से एक है। ऐसी कल्याणकारी योजना की शायद ही कोई मिसाल मिलती है, जिसके माध्यम से महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता दी जा रही है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 70.92 लाख महिला लाभार्थियों को लाभ मिल चुका है, जबकि हाल ही में पंजीकृत 5.20 लाख लाभार्थियों को 181.50 करोड़ रुपये की राशि मिल रही है।
शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए कई अभूतपूर्व पहल की हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायती कार्ड गरीबी या सामाजिक बुराइयों को समाप्त नहीं कर सकता। शिक्षा वह कुंजी है, जो लोगों को इस दुष्चक्र से बाहर निकाल सकती है और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठा सकती है। इसी कारण हमारी सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार और आम आदमी को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के अथक प्रयासों, जिनमें शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, ‘स्कूल्स ऑफ एमिनेंस’ और अन्य सुधार शामिल हैं, के कारण पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में केरल और अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के केवल 80 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की थी, जबकि 2026 में यह संख्या 11 गुना से अधिक बढ़कर 882 हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हमारी सरकार और पिछली सरकारों के बीच अंतर है, जिन्होंने कभी स्कूलों और शिक्षा क्षेत्र की परवाह नहीं की। हम शिक्षा में निवेश कर रहे हैं, क्योंकि यह पंजाब के लोगों को सशक्त बनाने का सबसे मजबूत माध्यम है।”
कृषि और बुनियादी ढांचे के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार 1,587 गांवों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है, जहां पहले कभी नहरी पानी नहीं पहुंचा था।
उन्होंने कहा कि राज्यभर के लोगों की सुविधा के लिए 45,000 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत और उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए 7,200 करोड़ रुपये खर्च किए हैं कि नहरी पानी हर खेत तक पहुंचे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार के सत्ता संभालने के बाद नहरी सिंचाई के तहत क्षेत्र 26 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2022 में केवल 20 लाख 89 हजार एकड़ भूमि को नहरी पानी मिलता था, जबकि आज नहरी सिंचाई 60 लाख 30 हजार एकड़ तक पहुंच गई है। यह वह बदलाव है, जो हमारी सरकार पंजाब में लेकर आई है।”





