संगरूर, 7 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के दिशा-निर्देशन में आयोजित विशेष प्रसार गतिविधि के दौरान घरेलू बगीचे में सर्दी के मौसम की सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए गांव संगतपुरा में 30 प्रदर्शनियां लगाई गईं। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अपनी घरेलू जरूरत के अनुसार ताजी और पौष्टिक सब्जियां अपने स्तर पर उगाने के लिए प्रेरित करना था।
फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर के प्रभारी एवं वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को सब्जियों के चयन, बुवाई के उचित समय, खादों के संतुलित उपयोग, सिंचाई और घरेलू बगीचे की देखभाल संबंधी व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी दी।

डॉ. गर्ग ने कहा कि आज के समय में घरेलू बगीचे का महत्व और बढ़ गया है। घर के आसपास थोड़ी सी जगह का उचित उपयोग करके परिवार की रोजमर्रा की जरूरत के अनुसार कई प्रकार की ताजी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं। इससे परिवार को लगातार ताजी, स्वच्छ और पौष्टिक सब्जियां मिल सकती हैं तथा बाजार से सब्जियां खरीदने पर होने वाले खर्च में भी कमी लाई जा सकती है। खेतों में ट्यूबवेल के पास या अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी घरेलू जरूरत के अनुसार सब्जियों की खेती की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सितंबर महीना सर्दी के मौसम की कई महत्वपूर्ण सब्जियों की बुवाई के लिए उपयुक्त समय है। ब्रोकोली, मटर, मूली, गाजर, शलजम और विभिन्न पत्तेदार सब्जियों की समय पर बुवाई करने से अच्छी पैदावार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई जा सकती हैं।
इसके साथ ही किसानों को धान में संतुलित पोषक तत्वों के प्रबंधन और फोक कम करने के लिए पोटाशियम नाइट्रेट के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि धान में फोक कम करने और दानों के भराव को बेहतर बनाने के लिए गोभ अवस्था में 1.5 प्रतिशत पोटाशियम नाइट्रेट (13:0:45) का पत्तियों पर छिड़काव करने की सिफारिश की जाती है। इसके लिए 3 किलोग्राम पोटाशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है।
किसान मेलों में अधिक से अधिक भाग लेने की अपील
इस अवसर पर डॉ. गर्ग ने किसानों को सितंबर 2026 के दौरान पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित किए जा रहे किसान मेलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों से इन मेलों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कृषि की नई तकनीकों, उन्नत किस्मों, कृषि मशीनरी और विश्वविद्यालय की नवीनतम सिफारिशों की जानकारी प्राप्त करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती और घरेलू स्तर पर सब्जियों की खेती—दोनों ही पारिवारिक आय, पोषण और प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों को अपनाते हुए खेती में नई और वैज्ञानिक तकनीकों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रदर्शनियों के सफल आयोजन में गांव के सुखतार सिंह, गुरविंदर सिंह, गोबिंदर सिंह, परगट सिंह और करमजीत सिंह (फौजी) ने विशेष सहयोग दिया। अंत में डॉ. गर्ग ने सुखतार सिंह की बासमती की फसल और करमजीत सिंह के बेडों पर बोई गई धान की फसल का निरीक्षण किया तथा विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुसार आवश्यक सलाह दी।






